मंत्री रेखा आर्या ने पति पर लगाए आरोप
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उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या की ओर से उनके पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। जिसके बाद मामले की जांच के लिए आज एसपी देहात जया बलूनी की अध्यक्षता में दस सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया है। जानकारी के अनुसार, अस्पताल में भर्ती मंत्री की तबीतय ठीक होने के बाद उनके बयान लिए जाएंगे।
जांच टीम में एसपी देहात जया बलूनी, अनुज कुमार(क्षेत्राधिकारी सहसपुर/विवेचक), कैलाश चन्द्र भट्ट(प्रभारी निरीक्षक कोतवाली नगर), उनि सन्दीप कुमार(भारी एसओजी नगर, देहरादून।) मउनि विनयता चौहान(कोतवाली डालनवाला), उनि कमलेश गौड़(थाना कैन्ट), उनि संदीप कुमार(कोतवाली नगर) हेका किरन कुमार(एसओ जी नगर, देहरादून) और संजीत कुमार।(थाना कैन्ट) शामिल हैं।
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ये है पूरा मामला
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने गुरुवार रात को अपने पति गिरधारी लाल साहू पर जालसाजी, जातिगत प्रताड़ना और जान से मारने का षडयंत्र रचने का आरोप लगाया था। कैबिनेट मंत्री की शिकायत पर कैंट थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई थी। मंत्री का आरोप यह भी है कि उनका पति पहले से विवाहित है और वर्तमान में भी उनके विवाहेत्तर संबंध हैं। अब वह एक महिला के साथ मिलकर जान से मारना चाहता है। आरोप यह भी हैं कि मंत्री के पति ने कई दस्तावेज पर उनके फर्जी हस्ताक्षर कर उन्हें पदों से हटा दिया जबकि उन्होंने किसी भी पद से त्यागपत्र नहीं दिया है। मंत्री ने पुलिस को बताया था कि उनका विवाह 2004 में बरेली के रहने वाले गिरधारी लाल साहू से हुआ था। वह पहले से शादीशुदा थे इस बात को उन्होंने छुपाया। पहली शादी से उनके बच्चे भी हैं। जब उन्हें यह बात पता चली तब तक उनके भी बच्चे हो गए थे। ऐसे में लोक लिहाज के कारण वह चुप रहीं। आरोप है कि वह (रेखा आर्या)अनुसूचित जाति से आती हैं जबकि गिरधारी लाल साहू दूसरी जाति से हैं। पिछले कुछ समय से गिरधारी लाल साहू का व्यवहार बदलने लगा। कुछ समय बाद पता चला कि वर्तमान में साहू के दूसरी महिलाओं से संबंध हैं। इस पर जब उन्होंने आपत्ति जताई तो साहू ने मौखिक और लिखित दोनों रूप से उनसे माफी मांगी।
बावजूद इसके साहू की हरकतों में कोई बदलाव नहीं आया। जब उन्होंने इस बात का विरोध किया तो साहू ने उनके साथ मारपीट की। गाली गलौज की और जातिसूचक शब्द कहे। आरोप है कि साहू कई बार उनके सरकारी आवास पर आया और आपत्तिजनक शब्द कहे। इसके बाद और भी बातों का खुलासा हुआ। पता चला कि साहू ने दस्तावेज पर जाली हस्ताक्षर कर कंपनी ने उन्हें निदेशक पद से हटा दिया। जबकि उन्होंने ऐसा कोई भी पत्र नहीं बनाया और न ही कभी त्यागपत्र दिया।