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उत्तराखंड: पिछले एक पखवाड़े में हुई घटनाओं से आई आपदा से लोगों में हाहाकार

Tue, 24 Jul 2018 10:21 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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थराली में बादल फटा - फोटो : amar ujala file photo
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पिछले एक पखवाड़े के दौरान प्रदेश में बादल फटने की आठ से दस घटनाएं हो चुकी हैं। इस दौरान पिथौरागढ़ और चमोली में सबसे ज्यादा अतिवृष्टि एवं बादल फटने की घटनाएं रिकॉर्ड की गईं। वहीं, देहरादून के सीमाद्वार में भी बादल फटने से खासा नुकसान हुआ। इन घटनाओं के दौरान भी देखा गया कि केवल उन्हीं स्थानों पर बहुत तेज बारिश हुई। जबकि आसपास के ज्यादातर इलाकों में बहुत कम बारिश हुई। सोमवार को भी दून में इसी तरह का ट्रेंड देखा गया। शहर के ज्यादातर इलाकों में भारी बारिश हुई, लेकिन आईएसबीटी, क्लेमेंटटाउन समेत कुछ क्षेत्रों में बूंदाबांदी ही हुई।

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देवाल में यहां आपदा क्षेत्रों में एक हफ्ते बाद भी जनजीवन पटरी पर नहीं लौटा है। कैल नदी पर बना पैदल पुल बहने से बांक गांव के 60 ग्रामीण बुग्यालों में बनी छानियों में फंसे हैं। रास्ते और पुलों के क्षतिग्रस्त होने से यहां अब राशन का संकट बन रहा है। लोगों ने हेलीकॉप्टर से खाद्य सामग्री की आपूर्ति करने की मांग की है। बांक गांव के इंद्र सिंह, किशन दानू आदि ने बताया कि ग्रामीण पालतू मवेशियों के साथ छानियों में गए थे। इस दौरान ग्रामीण रोटेशन से गांव आकर छानियों में राशन सहित अन्य जरूरी सामान पहुंचाते हैं, लेकिन पिछले 15 जुलाई की रात्रि को क्षेत्र में हुई भारी बारिश से छानियों को जाने वाला पैदल मार्ग और कैल नदी पर बना पैदल पुल बह गया, जिससे बुग्यालों में पशुओं के साथ गए 60 ग्रामीण भी अभी तक छानियों में ही फंसे हैं। ग्रामीण मान सिंह, राजेंद्र सिंह, गंगा सिंह, कांति देवी, देवराम, गबर राम, कलम राम आदि ने बताया कि बांक गांव से 10 किमी दूर आली बुग्याल के पास तोलपानी, तौला, गिरगाड़ आदि बुग्यालों में लोग फंसे हैं। दीदना के पास कैल नदी पर बना पैदल पुल बहने से छानियों में रह रहे लोगों के लिए राशन सहित अन्य आवश्यक सामग्री की समस्या बन गई है। इंद्र सिंह, प्रमुख उर्मिला बिष्ट सहित अन्य ने छानियों में फंसे लोगों के साथ ही वाण, कुलिंग, बांक आदि गांवों में हेली सेवा से खाद्य सामग्री आपूर्ति करने की मांग की है। दूसरी ओर तहसीलदार माणिक लाल भेंतवाल ने बताया कि सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैं। लोनिवि पैदल मार्ग बनाने के प्रयास कर रहा है। पैदल मार्ग बनने के बाद खाद्य पदार्थों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। 

भू-धंसाव की जद में कुलिंग, सात परिवारों ने छोड़ा घर  
देवाल विकासखंड का कुलिंग गांव भू-धंसाव की जद में आ गया है। यहां लगातार हो रहे भू-धंसाव के चलते रविवार रात को सात परिवारों ने घर छोड़ दिए हैं। प्रभावितों ने गांव के जूनियर स्कूल में शरण ली है। सोमवार को सूचना पर तहसील प्रशासन ने गांव पहुंचकर प्रभावितों को टेंट वितरित किए। ग्राम प्रधान भुवन बिष्ट ने बताया कि रविवार रात्रि को गांव के मदन सिंह, प्रेम सिंह, बलवंत सिंह, भवान सिंह, शांति देवी, धन सिंह और हीरा सिंह आदि के मकानों में दरारें आ गई। रात में ही सभी संबधित परिवारों को गांव के जूनियर हाईस्कूल के तीन कमरों में शिफ्ट कर दिया गया। प्रधान बिष्ट ने बताया कि गांव के नीचे लगातार भूस्खलन हो रहा है, जिससे गांव को खतरा बना है। सूचना पर गांव पंहुचे तहसीलदार माणिक लाल भेंतवाल ने बताया कि सात मकानों में दरारें हैं, जिन्हें टेंट वितरित किए गए हैं। गदेरे में वैकल्पिक पुल का निर्माण किया जा रहा है, पुल बनने पर गांव में खाद्य सामग्री भिजवाई जाएगी। 
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गांवों में ही कैद हुई दस गांवों की 4000 आबादी
गोपेश्वर में बिरही-निजमूला मार्ग के अवरुद्ध होने से दस गांवों की करीब चार हजार की आबादी अपने गांवों में ही कैद होकर रह गई है। भारी बारिश से मार्ग पर चट्टान टूटने से मोटर पुल क्षतिग्रस्त हो गया है और पैदल रास्ते भी बंद हो गए हैं। रविवार शाम छह बजे निजमूला सड़क अवरुद्ध हो गई थी। यह सड़क गौंणा, तड़ागताल, धारकुमाला, पठेला, दुर्मी, पगना, पाणा, ईराणी, झींझी और सिरमूला गांव के ग्रामीणों के आवागमन का एकमात्र साधन है। सोमवार को ग्रामीण लंबी दूरी पैदल नापकर अपने गंतव्य को पहुंचे। 15 जुलाई से क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग का पैदल रास्ता भी क्षतिग्रस्त पड़ा हुआ है, जिससे ग्रामीण जंगल के रास्ते आवाजाही कर रहे हैं। तड़ागताल, पठेला, धारकुमाला और सिरमूला गांव के छात्र-छात्राएं इंटर स्तर की पढ़ाई के लिए जीआईसी गौणा पहुंचते हैं, लेकिन सड़क और पैदल मार्ग अवरुद्ध होने से सोमवार को छात्र भी विद्यालय तक नहीं पहुंच पाए। प्राथमिक और जूनियर स्तर के विद्यालयों में शिक्षक भी जोखिम उठाते हुए स्कूल पहुंचे।  

चौथे दिन भी सेना और आईटीबीपी के लिए नहीं खुला मलारी हाईवे  
जोशीमठ-मलारी हाईवे चौथे दिन भी तमक नाले में सुचारु नहीं हो पाया है। चीन सीमा क्षेत्र में सेना और आईटीबीपी के वाहनों की आवाजाही सोमवार को भी ठप रही। तमक नाले में अभी भी मलबा और बोल्डर अटके होने से हाईवे सुचारु नहीं हो पाया है। यहां सीमा सड़क संगठन की ओर से सीमा क्षेत्र के गांवों को जाने वाले छोटे वाहनों की आवाजाही क्षतिग्रस्त पुल से करवाई जा रही है, जबकि सेना के भारी वाहनों के लिए हाईवे सुचारु नहीं हो पाया है।  

दो दिन बाद भी नहीं खुला यमुनोत्री हाईवे
ओजरी डबरकोट में बिना बारिश के भी पहाड़ी से बोल्डरों की बरसात होने से यमुनोत्री हाईवे पर दो दिन बाद भी यातायात बहाल नहीं हो पाया। भूस्खलन की भयावहता को देखते हुए प्रशासन ने इस हिस्से में यात्रा प्रतिबंधित कर दी है। अब तीर्थयात्रियों को तिर्खली कुंसाला होते हुए पैदल ही यमुनोत्री धाम की ओर भेजा जा रहा है। बीते शनिवार से करीब बीस तीर्थयात्री अपने निजी वाहनों समेत जानकीचट्टी की ओर फंसे हुए हैं। 

दो मोटर पुल और सात पैदल पुलिया में एक का भी पुनर्निर्माण नहीं
कर्णप्रयाग की पिंडर घाटी में विगत 15 जुलाई को हुई भारी बारिश से थराली और देवाल ब्लाक में दो मोटर पुल बह गए, जबकि सात से अधिक पैदल पुलिया बाढ़ की भेंट चढ़ गई। इनमें प्रशासन ने अभी तक मोटर पुलों की सुध ली है और न ही किसी पैदल पुलिया की। ब्लाक प्रमुख उर्मिला बिष्ट के अनुसार 15 जुलाई की रात्रि में लोहाजंग-वाण मोटर मार्ग पर कुलिंग के पास एक लोहे का मोटर पुल और एक पुलिया बह गई, जबकि कुलिंग और बांक गांवों में चार से अधिक पैदल पुलिया बह गई थी, जिससे गांवों में आवागमन के रास्ते ठप हो गए। सोल पट्टी के रतगांव में एक मोटर पुल बाढ़ की भेंट चढ़ गया था, जबकि यहां गांवों को जोड़ने वाली तीन पैदल पुलिया भी बह गई। इस दौरान ग्रामीणों ने रतगांव में वैकल्पिक व्यवस्था से लकड़ी का पुल बनाने का प्रयास किया लेकिन इस प्रयास में रतगांव का ग्रामीण सुजान सिंह गदेरे के तेज बहाव में बह गया। बांक में ग्रामीणों ने एक वैकल्पिक पुल बनाया है। तहसीलदार एमएल भेंतवाल ने बताया कि देवाल के कुलिंग में पीएमजीएसवाई वैली ब्रिज बनाने का काम जल्द शुरू करेेगा।

लामबगड़ में दलदल में तब्दील हुआ बदरीनाथ हाईवे  
रुक-रुककर लगातार हो रही बारिश से बदरीनाथ हाईवे लामबगड़ भूस्खलन क्षेत्र में दलदल में तब्दील हो गया है। यहां चट्टान से छिटक रहे मलबे में यात्रा वाहन रपट रहे हैं। सोमवार को हाईवे पर करीब चार घंटे तक यात्रा वाहनों की आवाजाही ठप रही। सुबह पांच बजे जैसे ही बदरीनाथ धाम के लिए यात्रा वाहनों की आवाजाही शुरू हुई तो लामबगड़ में वाहन दलदल में फंसने लगे। यहां चट्टान से पत्थरों के गिरने का भय भी बना हुआ है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने दोनों ओर से यात्रा वाहनों की आवाजाही रोक दी। मेकाफेरी कंपनी की ओर से दलदली भाग में पत्थर और मिट्टी बिछाई गई। सुबह नौ बजे हाईवे को वाहनों की आवाजाही के लिए सुचारु किया गया। इसके बाद पांडुकेश्वर में रोके गए करीब 720 तीर्थयात्रियों को बदरीनाथ धाम के लिए रवाना किया गया, जबकि लामबगड़ बाजार में रोके गए 453 तीर्थयात्रियों को उनके गंतव्य को भेजा गया। जोशीमठ के उपजिलाधिकारी योगेंद्र सिंह का कहना है कि बदरीनाथ हाईवे पर लामबगड़ में सुरक्षा को देखते हुए रोक-रोक कर यात्रा वाहनों की आवाजाही करवाई जा रही है।

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