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ईद-उल-फितर 2020: देहरादून में दिखा चांद, सोमवार को मनाई जाएगी ईद, घर में ही नमाज पढ़ने की अपील

Sun, 24 May 2020 10:20 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • कोरोना लॉकडाउन के बीच दिखा ईद का उल्लास, सोशल मीडिया पर दी एक दूसरे को बधाई
  • उलेमाओं ने की घर पर रहकर नमाज पढ़ने की अपील, पांच या अधिक लोग कर सकते हैं घर पर जमात
  • इससे कम लोग सुबह नौ बजे चार रकअत चाश्त के पढ़ें
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- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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माहे रमजान के आखिरी रोजे की शाम को ईद का चांद दिख गया। देहरादून में भी चांद दिखने के बाद ईद का उल्लास नजर आया। लोगों ने एक दूसरे को सोशल मीडिया के माध्यम से बधाई दी। उधर, उलेमाओं ने अपील की है कि लोग अपने घरों में ही रहें, घर पर ही नमाज अदा करें। इस बार कोरोना लॉकडाउन के चलते किसी भी ईदगाह में ईद की नमाज अदा नहीं की जाएगी। रविवार की शाम को चांद दिखा तो लोग उत्साह में नजर आए। शहर मुफ्ती सलीम अहमद ने कहा कि कोरोना महामारी के इस मुश्किल दौर में जितना हो सके, अपने घर में ही सुरक्षित रहें।

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शहर मुफ्ती सलीम अहमद ने कहा कि  बहुत सारी उलझने हैं, मौजूदा हालात में हर साल की तरह इस साल ईद मनाना मुमकिन नहीं है। हर साल की तरह इस साल ईदगाह में नमाज अदा नहीं कर पाएंगे। इसलिए ईद के सिलसिले में बहुत सारे लोग उलझनों का शिकार हैं। ईद की नमाज हर उस शख्स पर वाजिब है, जो कि ईदगाह या मस्जिद के अंदर नमाज अदा कर सकता हो। हदीस में आया है कि अगर वह इस स्थिति में न हो तो वह घर पर नमाज अदा कर सकता है।

इसके लिए चार रकअत नमाज नफिल चाश्त की अदा कर लें। यह दो-दो रकअत करके पढ़नी होगी। इसकी नीयत दो रकअत नमाज नफिल वासते अल्लाह के, मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ कहकर बांधनी है। इसके बाद नीयत बांधकर रोजमर्रा की तरह नमाज पढ़ें। इस नमाज का वक्त इशराक यानी सूरज निकलने से लेकर जवाल यानी 12 बजे तक है। खुतबों में न उलझें, हर किसी के वश की बात नहीं है। इमामत करना भी हर किसी के वश में नहीं है।
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फासला रखें, दूरियां नहीं : गले मिलने के बजाए दिल पर हाथ रखकर कहें ईद मुबारक
जमीयत उलेमा ए हिंद देहरादून के जिलाध्यक्ष मुफ्ती रहीस अहमद का कहना है कि कोरोना महामारी के बीच इस साल निश्चित तौर पर सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी है लेकिन गले मिलने के बजाए दिल पर हाथ रखकर आप भी ईद मुबारक कह सकते हैं।

उन्होंने कहा कि मुहम्मद साहब ने भी यह फरमाया है कि जब कोरोना जैसी वबा यानी महामारी फैली हुई हो तो वहां का आदमी दूसरी जगह न जाए और न ही एक शहर से दूसरे शहर जाए।

दूसरी हदीस में यह आया है कि बीमारी जब फैलने लगे तो सलामत वही रहेगा, जो कि खुद को घरों में रखेगा। उन्होंने यह भी अपील की कि  ईद का इस्तकबाल करने के लिए कम से कम छह फिट की दूरी बनाकर रखें।

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