26 साल से दुर्गम में पढ़ा रहे शिक्षक के तबादले के आवेदन को मौखिक आदेश के आधार पर निरस्त करने के मामले में शिक्षा सचिव भूपेंद्र कौर और माध्यमिक शिक्षा निदेशक आरके कुंवर ने बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट में जवाब पेश किया। कोर्ट ने इस मामले में याची से प्रतिशपथ पत्र मांगा है।
न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकल पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। पौड़ी गढ़वाल निवासी गणेश बड़ोला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि वे 26 साल से दुर्गम क्षेत्र में शिक्षण कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने जब सुगम में तबादले के लिए विभाग को प्रार्थना पत्र दिया तो विभाग ने उनसे कहा कि उनका प्रार्थना पत्र उच्च अधिकारियों ने मौखिक तौर पर निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि सरकारी विभागों में कोई भी कार्य मौखिक तौर पर कहने से नहीं होता है।
लिखित आदेश न होने का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने शिक्षा सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने दुर्गम या सुगम में छह वर्ष से ज्यादा का समय व्यतीत करने वालों की सूची भी तलब की थी। बृहस्पतिवार को शिक्षा सचिव ने इस संबंध में जवाब दाखिल किया है। पीठ ने याचिकाकर्ता को प्रतिशपथ दाखिल करने के निर्देश दिए।