राजधानी देहरादून में शिक्षा विभाग की व्यवस्था समझ से परे है। शिक्षा सत्र शुरू हुए चार महीने हो चुके हैं, लेकिन नौवीं और दसवीं के बच्चों को अब ‘उद्यमिता विकास एवं शारीरिक शिक्षा’ की पुस्तक खरीदवाई जा रही है।
खास बात यह है कि यह किताब बाजार में उपलब्ध नहीं है। इसके लिए हर बच्चे को स्कूल में ही 57 रुपये जमा करने हैं। सूत्रों का कहना है कि एक खास प्रकाशक को लाभ पहुंचाने के लिए यह किताब लागू की गई है।
अहम सवाल यह है कि यह पुस्तक सत्र की शुरुआत में ही बच्चों को क्यों उपलब्ध नहीं कराई गई। शिक्षकों की मानें तो इस किताब को अगले सत्र से भी लगाया जा सकता था। कुछ शिक्षकों का कहना है कि बच्चों से पैसा जमा करवाने के लिए कोई लिखित आदेश तक नहीं है। रुपये जमा करने के बाद भी यह किताब कब तक मिलेगी कुछ कहा नहीं जा सकता।
मध्य शिक्षा सत्र में बच्चों से पैसा जमा करवाया जाना समझ से परे है, यदि किताब इतनी महत्वपूर्ण है तो शिक्षा सत्र शुरू होते ही इसे बच्चों को उपलब्ध कराया जाना चाहिए था।
- अजय राजपूत, प्रदेश प्रवक्ता, राजकीय शिक्षक संघ
पाठ्य पुस्तक पाठ्यक्रम में शामिल है, इस पुस्तक को प्रकाशित करने के लिए निदेशालय से टेंडर आमंत्रित किए गए थे, लेकिन शुरूआत में कोई प्रकाशक तैयार नहीं हुआ। इससे इसमें देरी हुई, 60 फीसदी पुस्तकें स्कूलों को उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।
- केएस रावत, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक
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