अधीनस्थ चयन सेवा आयोग (यूकेएसएसएससी) पेपर लीक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने देहरादून से लेकर लखनऊ तक आरोपियों के ठिकानों पर छापे मारे। देहरादून और उत्तरकाशी में हाकम सिंह की संपत्तियों की जांच की गई। ईडी ने पूरे दिन में करीब 30 जगहों पर छापे मारे। ईडी आरोपियों की संपत्तियों को भी जब्त कर सकती है। एजेंसी की टीम की यह कार्रवाई बुधवार को भी जारी रहने की संभावना है।
गौरतलब है कि पिछले साल मई में एसटीएफ ने स्नातक स्तरीय परीक्षा के पेपर लीक मामले की जांच शुरू की थी। इस मामले में रायपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। एसटीएफ ने परीक्षा आयोजित कराने वाली कंपनी आरएमएस टेक्नो सॉल्यूशन कंपनी के मालिक राजेश चौहान, उत्तराखंड के नकल माफिया हाकम सिंह, ऊधमसिंहनगर से चंदन मनराल आदि समेत कुल 43 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें से कई के खिलाफ एसटीएफ ने ईडी को भी कार्रवाई के लिए पत्र लिखा था।
बताया जा रहा है कि ईडी भी मामले की तीन महीने से जांच कर रही थी। इसी बीच ईडी की एक टीम अपने वाहनों से मंगलवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे पुलिस लाइन देहरादून पहुंची। यहां से 60 लोगों की टीम को अपने साथ लिया और अलग-अलग जगह छापे मारने के लिए निकल गई। टीम मंगलवार सुबह करीब नौ बजे रायपुर के दशमेशनगर स्थित हाकम सिंह की संपत्ति पर पहुंची। यहां हाकम सिंह ने एक पीजी हॉस्टल बनाया हुआ है।
इस हॉस्टल मेें कागजातों की जांच की गई। इस टीम ने यहां पर करीब सात घंटे तक पड़ताल की। ईडी हॉस्टल से कई कागजात अपने साथ ले गई है। इनके कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई। बताया जा रहा है कि ईडी जल्द ही इस हॉस्टल को अटैच कर सकती है।
यहां भी मारे गए छापे
उत्तरकाशी : ईडी की टीम उत्तरकाशी के मोरी में पहुंची। मोरी में हाकम सिंह की कभी ‘सल्तनत’ चलती थी। सैकड़ों युवाओं को उसने पेपर बेचकर लाखों रुपये कमाए। यहां पर उसका एक रिजॉर्ट था, लेकिन प्रशासन इसे ढहा चुका है। हाकम के मोरी स्थित घर में भी ईडी ने जांच पड़ताल की। करीब चार घंटे तक परिजनों से भी संपत्तियों के बारे में जानकारी जुटाई गई।
-
रामनगर : ऊधमसिंहनगर का रामनगर तराई के नकल माफिया चंदन सिंह मनराल का गढ़ रहा है। चंदन ने ऊधमसिंहनगर के दर्जनों युवाओं को पेपर बेचा था। उसकी वहां पर ट्रांसपोर्ट कंपनी और एक स्टोन क्रशर भी है। तीन टीमों ने उसके घर, स्टोन क्रशर और ट्रांसपोर्ट कंपनी के ऑफिस पर छापे मारे। दर्जनों दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं।
बिजनौर के धामपुर : पेपर लीक मामले में बिजनौर का धामपुर कस्बा इस धांधली का केंद्र बनकर उभरा था। जांच में पता चला था कि यहां टीचर्स कॉलोनी निवासी केंद्रपाल ने अपने घर में ही नकल सेंटर बनाया हुआ था। केंद्रपाल हाकम सिंह का खास दोस्त था। उसने कई और परीक्षाओं में धांधली भी यहीं बैठे हुए कराई थी। ईडी ने उसके घर और दफ्तर पर भी दबिश दी।
लखनऊ : सारा खेल हाकम सिंह के साथ मिलकर आरएमएस कंपनी के मालिक राजेश चौहान ने तैयार किया था। पुलिस ने इसे मास्टरमाइंड बताया था। उसकी लखनऊ में प्रिंटिंग प्रेस, घर और कंपनी के दफ्तर पर तीन टीमों ने कार्रवाई की। यहां से सैकड़ों दस्तावेज कब्जे में लिए गए हैं।
सहारनपुर : सहारनपुर के जल संस्थान में तैनात एक जेई को भी एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था। उसने अपनी पत्नी को इस परीक्षा में नकल कराई थी। बताया गया था कि उसने और भी जगहों पर पेपर बेचे थे। ऐसे में उसने करोड़ों रुपये की संपत्तियां बनाई थीं।
पुलिस और प्रशासन भी कर चुका है संपत्तियों पर कार्रवाई
पुलिस ने इस मामले में 23 आरोपियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई की थी। गैंगस्टर एक्ट की धारा 14 (1) के तहत कार्रवाई करने के लिए पुलिस ने रिपोर्ट तैयार की थी। इसके तहत हाकम सिंह की 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति को जब्त किया गया। इसके अलावा चंदन मनराल की 11 करोड़ रुपये की संपत्ति पर कार्रवाई हुई। इसके अलावा पांच और आरोपियों की संपत्तियों की रिपोर्ट तैयार की गई है। जल्द ही जिला प्रशासन इन पर भी कार्रवाई कर सकता है।