प्रदेश में सातवीं आर्थिक गणना नौ सितंबर से शुरू होगी। इस गणना को 6600 कॉमन सर्विस सेंटर अंजाम देंगे। इसके लिए करीब पांच हजार प्रगणकों का चयन कर लिया गया है और करीब दो हजार प्रगणकों का चयन होते ही गणना शुरू कर दी जाएगी। इस बार आर्थिक गणना में प्रगणकों को गलत जानकारी देने या जानकारी देने से इनकार करने पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।
2014 में हुई छठवीं आर्थिक गणना में यह सामने आया था कि प्रदेश में कुल उद्यमों से करीब साढ़े दस लाख लोग रोजगार पा रहे हैं। कृषि से रोजगार में करीब 73 हजार और गैर कृषि कार्य से करीब 9.7 लाख लोग जुड़े हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 41 प्रतिशत और नगरीय क्षेत्रों में करीब 59 प्रतिशत उद्यम हैं। अब हो रही आर्थिक गणना से यह खुलकर सामने आएगा कि इन पांच सालों में प्रदेश ने रोजगार के क्षेत्र में कितनी दूरी तय की है।
इस बार की गणना में पहली बार कॉमन सर्विस केंद्रों का सहयोग लिया जा रहा है। प्रदेश में करीब 9500 सीएससी हैं और इनमें से इस बार की गणना में 6600 सीएससी को शामिल किया गया है। इस बार की गणना में हर आर्थिक गतिविधि के संचालक स्थल को जियो टैग भी किया जा रहा है। प्रदेश में करीब 22 लाख घरों और दुकानों में दस्तक देने के अलावा इस गणना में सड़क से लेकर भवनों में संचालित हो रही हर आर्थिक गतिविधि दर्ज की जाएगी। एनएसएसओ के उप महानिदेशक राजेश कुमार के मुताबिक पूरे प्रगणक चयनित होते ही गणना का काम शुरू कर दिया जाएगा।