जलवायु परिवर्तन के दौर में पारिस्थितिकी संरक्षण के तरीके खोजने के लिए कॉमनवेल्थ देश दून में जुटेंगे। देहरादून में कॉमनवेल्थ फोरेस्ट्री कॉंफ्रेंस (सीएफसी)-2017 का आयोजन किया जा रहा है।
सीएफसी का एजेंडा तैयार कर लिया गया है। इसमें जैव विविधता समेत छह बिंदुओं को शामिल किया गया है। कॉंफ्रेंस में कॉमनवेल्थ देशों के अलावा मैक्सिको और अन्य अमेरिकी राज्यों के प्रतिनिधि भी शामिल हो सकते हैं।
कॉमनवेल्थ एसोसिएशन में वैसे तो विश्व के 53 देश शामिल हैं, लेकिन अभी तक आस्ट्रेलिया, मैक्सिको, कनाडा, कीनिया समेत 12 देशों ने अपनी स्वीकृति वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) को भेज दी है। देहरादून में पहली बार हो रही कॉमनवेल्थ देशों की इस कॉंफ्रेंस के एजेंडे में जैव विविधता संरक्षण एवं प्रबंधन, जंगलों से आजीविका एवं आर्थिक सुरक्षा, विविधताएं एवं बहुप्रयोग, वनों के बेहतर नियम कानून, वन और जलवायु परिवर्तन, वन और जल को शामिल किया गया है।
एफआरआई में सीएफसी-2017 का आयोजन तीन से सात अप्रैल तक किया जाएगा। इस कार्यक्रम में जैव विविधता, वन और पारिस्थितिकी में जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से बचने पर मंथन के साथ कॉमनवेल्थ देश विकास का रोड मैप भी तैयार करेंगे। इस मौके पर नई गाइडलाइंस भी तैयार की जा सकती है।
यह तय किया जाएगा कि जंगल, जल, जैव विविधता को किस तरह सहेजा जाए, जिससे विकास की प्रक्रिया भी चालू रहे व पर्यावरण और पारिस्थितिकी भी संरक्षित रहे। इसके साथ ही जंगल से लोगों की आजीविका को जोड़ना भी एक अहम पहलू है। वनों और पहाड़ों से सेवाएं ऐसे ली जाएं कि यह प्रक्रिया सतत चालू रहे। एक साथ इतना दोहन न हो कि पारिस्थितिकी नष्ट हो।