Nandhaur Sanctuary reserve
लोगों के विरोध को देखते हुए अब ईको सेंसिटिव जोन का 578 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा टाइगर रिजर्व से बाहर कर दिया गया है। अब टाइगर रिजर्व की हद सिर्फ अभयारण्य तक ही सीमित रहेगी। हाल ही में हुई स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड की बैठक में भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इको सेंसिटिव जोन में ही अधिकतर आबादी है। टाइगर वैसे भी नंधौर के कोर जोन में ही रहते हैं।
रिजर्व का क्षेत्रफल कम करने से खनन पर नहीं पड़ेगा असर
नंधौर अभयारण्य में टाइगर रिजर्व बनने पर खनन पर कोई असर नहीं होगा। केंद्र के नियमानुसार टाइगर रिजर्व, अभ्यारण्य से 10 किमी की दूरी पर खनन होना चाहिए। वर्तमान में अभयारण्य से 10 किमी से अधिक दूरी पर खनन होता है। अब वहां रिजर्व बन जाएगा तो कोई बदलाव नहीं आएगा। खनन बंद होने की आशंका को लेकर भी टाइगर रिजर्व का विरोध हो रहा है। गांव के लोगों का कहना है कि खनन से ही क्षेत्र में कई लोगों का रोजगार जुड़ा है।