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इको सेंसिटिव जोन फिर बना सरहदी सड़कों के निर्माण में रोड़ा

Thu, 19 Jan 2017 11:29 AM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में अंतरराष्ट्रीय सरहद के उस पार जहां चीन ने शानदार सड़कें बना ली हैं, वहीं सरहद के ठीक इस तरफ सड़कों का निर्माण भागीरथी इको सेंसटिव जोन के नियमों में फंसता दिख रहा है।
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यही नहीं चारधाम की सड़कों का निर्माण भी इन नियमों से प्रभावित हो रहा है। सड़कों के निर्माण को लेकर केंद्रीय जलसंसाधन मंत्रालय आपत्ति जता चुका है। इससे नाखुश प्रदेश सरकार रक्षा मंत्रालय और विधि मंत्रालय के समक्ष अपनी बात रखने वाली है।

उल्लेखनीय है कि भागीरथी इको सेंसिटिव जोन का कुछ हिस्सा चीन से सटे सरहदी इलाकों के अंतर्गत आता है। सरहदी इलाकों के आस पास सड़कों के निर्माण, लैंड यूज परिवर्तन और विकास कार्यों को लेकर बीते वर्ष 31 अगस्त को केंद्रीय वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के विशेषज्ञों की नई दिल्ली में एक बैठक हुई थी।
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बैठक में 30 अधिकारियों के साथ पहुंचे उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्य सचिव एस रामास्वामी ने चीन की तरह इस पार भी वैसी ही सड़कें बनाने के लिए नियमों में ढील देने का आग्रह किया था। इसके बाद विशेषज्ञों की टीम द्वारा नियमों में ढील दिए जाने के बाद इन कार्यों के लिए एक मास्टर जोनल प्लान तैयार किया गया। बाद में केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने इस प्लान पर आपत्ति जता दी। इससे सड़कों के निर्माण का काम जहां का तहां ठप पड़ गया।

यही नहीं मंत्रालय की आपत्ति के बाद 124 किलोमीटर की लंबी गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना भी अटक गई। अब दूसरे धामों से गंगोत्री की ओर आने वाली प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और लोक निर्माण विभाग की सड़कों के निर्माण के काम पर भी संकट के बादल हैं।

जोन के संबंध में मुख्य रूप से वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को निर्णय लेना है। हालांकि जल संसाधन मंत्रालय के अलावा रक्षा मंत्रालय भी इस निर्णय में शामिल होंगे। मसला सीमा सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण प्रदेश सरकार रक्षा मंत्रालय से भी रायशुमारी करने वाली है। केंद्र सरकार के समक्ष राज्य प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय सीमा सुरक्षा और चारधाम के श्रद्धालुओं को हो रही तकलीफों का हवाला दिया है। फिलहाल एनजीटी में भी मामले की सुनवाई चल रही है।

सीमा क्षेत्र में चीन की तैयारी
- बीजिंग से ल्हासा तक रेल लाइन का निर्माण कर चुका है।
- क्यूनमिंग से ल्हासा तक रेलवे लाइन का निर्माण, तकलाकोट में रेल सेवा।
- तकलाकोट से भारतीय सीमा लिपुलेख दर्रे तक 37 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई।
- ल्हासा से अरुणाचल प्रदेश में त्वांग सीमा तक सड़क बना चुका है।
- तिब्बत स्थित एवरेस्ट बेस कैंप तक 108 किलोमीटर लंबे राजमार्ग का निर्माण।
- भारतीय सीमा से सटे इलाकों में मोबाइल, फोन और खुफिया नेटवर्क फैला रखा है।
- तिब्बत में पांच हवाई अड्डों के अलावा व्यापक सड़क नेटवर्क विकसित कर चुका है।

भारत का सीमा पर रोड नेटवर्क
- अप्रैल, 2016 में जोशीमठ-मलारी हाई-वे का डबल लेन कार्य सीमा क्षेत्र के अंतिम स्टेशन रिमखिम पहुंचा। इसके साथ ही रिमखिम तक सेना के वाहनों की आवाजाही भी शुरू हो गई।
- जनवरी, 2015 में हिमाचल के किन्नौर में सीमा से सटी दुमती आईटीबीपी पोस्ट तक पहुंच के लिए 23 किलोमीटर लंबी सड़क बनाए जाने के लिए केंद्र सरकर ने 11 करोड़ रुपये का बजट जारी किया।
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जब चीन ने जताया एतराज
अक्तूबर, 2014 में अरुणाचल में मैक मोहन रेखा के पास रोड नेटवर्क विकसित करने की भारत की योजना पर चीन ने एतराज जता चुका है।
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