चमोली जिले से लगी चीन (तिब्बत) की सीमा तक सेना की पहुंच पहले के मुकाबले अब काफी आसान हो गई है। सीमा सड़क संगठन ने चमोली से लगने वाली दो सीमाओं माणा और बाड़ाहोती तक के क्षेत्र को सड़क मार्ग से जोड़ दिया है। यह स्थिति 1962 में नहीं थी।
तब युद्ध के समय सेना को सीमा तक पैदल पहुंचने में 20 दिन लगे थे। स्थानीय लोगों ने घोड़े-खच्चरों और याक के जरिये सेना के सामान को सरहद तक पहुंचाने में काफी मदद की थी।
चमोली जिले से चीन (तिब्बत) की सीमा दो क्षेत्रों से लगती है। पहला बदरीनाथ से माणा पास और दूसरा मलारी से बाड़ाहोती। बीआरओ के कमांडर मनीष कपिल के अनुसार बीआरओ ने जोशीमठ से मलारी तक 60 किमी सड़क डबल लेन और मलारी से रिमखिम तक 45 किमी सिंगल लेन सड़क बनाई है, जबकि माणा से माणापास तक 52 किमी सड़क पूरी बन चूकी है।
1950 से ही सड़क बनाने लग गया था चीन
वरिष्ठ पत्रकार हरीश चंद्र चंदोला ने बताया कि वह 1950 से 1954 के बीच दोनों दर्रों से तिब्बत यात्रा पर गए थे। तब सीमा तक पहुंचने में 20 दिन लग जाते थे। सीमा पार तब चीनी सैनिक नीली वर्दी में गैती, फावड़ा लेकर सड़क बनाने में जुटे रहते थे। आज भारत की सीमा तक भी सड़क पहुंच चुकी है।