वाडिया के वैज्ञानिकों के मुताबिक पिछले एक साल के अध्ययन में यह बात सामने आई है कि पश्चिमी विक्षोभ के चलते उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कभी कार्बन का स्तर 0.1 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तो कभी चार माइक्रोग्राम तक मापा गया है। बारिश के दौरान कार्बन की मात्रा कम पाई गई है।
अगले साल के डाटा का अध्ययन करके यह जानकारी जुटाई जाएगी कि आखिरकार कार्बन की मात्रा किस दर से बढ़ रही है। पृथ्वी दिवस पर इस बार की थीम ‘प्रोजेस्ट ऑवर स्पेसीज’ रखी है। दुनियाभर के वैज्ञानिकों का कहना है यदि मानव जीवन सुरक्षित रखना है तो धरती की सभी प्रजातियों का संरक्षण करना होगा।
वाडिया के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पीएस नेगी का कहना है कि पृथ्वी अकेला ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन है। कल्पना की जा रही है कि ब्रह्मांड में कई अन्य ग्रहों पर भी जीवन है। लेकिन, अभी तक इसके ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं। यदि पृथ्वी को बचाना है तो ओजोन परत को बचाना होगा। दुनिया में अधिक से अधिक वनीकरण करने के साथ ही सूख रही नदियाें का संरक्षण करना होगा। प्रदूषण कम करने को लेकर ठोस कदम उठाने होंगे।
उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कार्बन की मात्रा बढ़ रही है यह खतरनाक स्थिति है। यूरोपीय देशों में तेजी से खतरनाक हो चुका प्रदूषण इसकी वजहों में से एक है। पश्चिमी विक्षोभ के जरिए कार्बन की भारी मात्रा हिमालयी क्षेत्रों में पहुंच रही है। यदि समय रहते इसे रोकने के लिए ठोस नीतियां नहीं बनाई तो हिमालयी क्षेत्र का पारिस्थितिकी तंत्र बिगड़ने का नतीजा सबको भुगतना होगा।
-डॉ. पीएस नेगी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी