पित्थूवाला क्षेत्र में पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) लाइनों को बिछाने में गेल ने जल संस्थान की पानी की लाइनें तोड़ दीं। इससे लाखों लीटर पानी बर्बाद हुआ। इसकी प्रतिपूर्ति करने में अब गेल के पसीने छूट रहे हैं।
जल संस्थान के मुताबिक पाइपलाइन टूटने से लोगों को टैंकरों से पानी की आपूर्ति करनी पड़ी। इसमें छह लाख 60 हजार रुपये खर्च हुए। इसके अलावा लाखों रुपये का पानी बर्बाद हुआ और लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं। इसकी प्रतिपूर्ति के लिए जल संस्थान ने गेल को करीब 38 लाख रुपये का नोटिस भेजा है। इसमें 25 लाख 28 हजार 268 रुपये सिर्फ पानी की बर्बादी के एवज में मांगे गए हैं। कई महीने बाद भी गेल ने अब तक ये राशि जमा नहीं की।
सूत्रों ने बताया कि गेल गैस प्रबंधन को पानी की बरबादी और उपभोक्ताओं को टैंकरों से की गई आपूर्ति की कीमत पर संशय है। जलसंस्थान का कहना है कि उन्होंने लाइनों की क्षमता, समय व दिनों के आधार पर पानी बरबादी की कीमत का आंकलन कर क्षतिपूर्ति मांगी है। गेल के अधिकारी इस संबंध में कुछ भी स्पष्ट बोलने के लिए तैयार नहीं हैं।
I23 नवंबर से 12 दिसंबर तक बहता रहा पानी
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प्रतापनगर में पीएनजी लाइन बिछाने के समय पाइप लाइन तोड़ी गई। गेल गैस प्रबंधन ने लीकेज तलाशने को तीन-चार जगह खुदाई की। गेल की ओर से तीन दिनों में पाइप लाइन ठीक करने की बता कही गई, लेकिन इस प्रक्रिया में 23 नवंबर से 12 दिसंबर तक का समय लगा। जल संस्थान के आंकलन के मुताबिक इसमें 7,59,240 रुपये का पानी बरबाद हो गया।
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Iजीएमएस रोड में लाइन टूटने से कई इलाके में नहीं पहुंचा पानीI
गेल ने जीएमएस रोड भूसा स्टोर के पास पेयजल लाइन को क्षतिग्रस्त कर दिया। इससे द्वारिकापुरी एक्टेंशन, द्वारिकापुरी,व्योमप्रस्थ, कांवली गांव आदि क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति बाधित रही। जलसंस्थान को टैंकरों के जरिये पानी भेजना पड़ा। इसमें 2,60,000 का खर्च आया। जल संस्थान के मुताबिक यहां 7,44,065 रुपये खर्च हुआ।
पानी की बर्बादी व टैंकरों के जरिये उपभोक्ताओं को पानी आपूर्ति और पेजयल लाइनों की क्षति में खर्च का हिसाब लगाकर नोटिस जारी किए गए हैं। पानी की बर्बादी बड़े पैमाने पर हुई है। समय-समय पर इसकी जानकारी गेल गैस प्रबंधन को दी गई है। - सतीश नौटियाल, एक्सईएन, पित्थूवाला जलसंस्थान