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दशहरा 2019: यहां शफीक बंधुओं के बिना अधूरा रहता है इस पर्व का उल्लास

Tue, 08 Oct 2019 08:26 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal भारतेंदु शंकर पांडेय, अमर उजाला, ऋषिकेश

सार

  • 55 वर्षों से रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण का पुतला बना रहा मुजफ्फरनगर के रियाजुद्दीन का परिवार
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आईडीपीएल रामलीला मैदान में तैयार होता रावण का पुतला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुसलमां और हिंदू की जान, कहां है मेरा हिंदुस्तान, मैं उसको ढूंढ रहा हूं... जैसी पंक्तियां लिखने वाले अजमल सुलतानपुरी यदि आज जिंदा होते तो शायद उनकी हसरतों को मुकाम मिल जाता। जिस कौमी एकता के लिए पूरा हिंदुस्तान प्यासा है उस सौहार्द की मिसाल ऋषिकेश में जीवंत देखी जा सकती है। 

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मरहूम रियाजुद्दीन का परिवार पिछले 55 वर्षों से दशहरा मेला की शान बना हुआ है। वालिद की मौत के बाद पुतला बनाने का जिम्मा दो सगे भाई शफीक और रफीक अहमद बखूबी निभा रहे हैं। यही नहीं शफीक बंधुओं ने अपनी आने वाली पीढ़ी को भी विरासत की कला सिखानी शुरू कर दी है। रावण, मेघनाद और कुुंभकर्ण का पुतला अपने हुनरमंद हाथों से बनाने वाले रियाजुद्दीन का परिवार खुद में बुराई पर अच्छाई की जीत का मीनार सरीखा कायम है। वर्ष 1964 में रियाजुद्दीन अहमद निवासी मोती महल मुजफ्फरनगर ने ऋषिकेश आईडीपीएल रामलीला मैदान में पहली बार रावण का पुतला बनाया था। उस समय दोनों भाई शफीक और रफीक अहमद अपने पिता के साथ यहां आते थे। 

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विरासत में मिली इस कला को अपने बच्चों को भी सिखा रहे

शफीक ने बताया कि वर्ष 1990 में पिता ने यहां अंतिम बार पुतला निर्माण किया था। इसके बाद उनका देहांत हो गया। वर्ष 1991 से वह अपने भाई रफीक के साथ आईडीपीएल में रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले का निर्माण कर रहे हैं। इस कार्य में उनके साथ दस अन्य लोगों की टीम भी लगी है। उन्होंने बताया कि पिता से विरासत में मिली इस कला को वह अपने बच्चों को भी सिखा रहे हैं। इस वर्ष उन्हें छह जगहों से पुतला बनाने की डिमांड मिली है। उनकी टीम में ओम प्रकाश, मोहन लाल, नीना, मोहम्मद अरशद, मोहम्मद जीशान, समेदिन, भूरा, अमजद, आकिल, मोहम्मद सादिक, मोहम्मद साहिल शामिल हैं। 

इन-इन जगहों से मिली डिमांड

शफीक अहमद ने बताया कि इस वर्ष छह जगहों से डिमांड मिली है। इसमें आईडीपीएल मैदान, त्रिवेणी घाट दशहरा कमेटी, श्री भरत रामलीला दशहरा कमेटी, लक्ष्मणझूला, टीएचडीसी और हरिद्वार शामिल हैं। उन्होंने बताया कि एक 50 फीट के पुतले का निर्माण करने में 30 हजार रुपये की लागत आती है। पुतलों के निर्माण में डेढ़ माह का समय लगता है।  

इस वर्ष आतिशबाजी में दिखेगी नाइग्राफॉल 

शफीक अहमद ने बताया कि इस वर्ष त्रिवेणी घाट पर 60 फीट के रावण का पुतला दहन किया जाएगा। इसमें रावण की नाभि में अग्निकुंड चक्र चलता दिखाई देगा। इसके अलावा इस वर्ष नाइग्राफॉल आतिशबाजी की जाएगी। बताया कि नाइग्राफॉल आतिशबाजी में ऐसा प्रतीत होता है जैसे पहाड़ों से पानी नीचे गिर रहा हो।
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