असलियत यह है कि जो भूमि डा. आरके गुप्ता ने खरीदी थी वह कहीं और है। उस भूमि पर किसी और का कब्जा बताया जा रहा है। अजय गर्ग के मुताबिक भूमि विक्रेता सावन सिंह ने उन्हें अन्यत्र जमीन देने की बात कही है। दान और मालिकाना हक के इस घटनाक्रम में नया मोड़ तब आया जब भूमि स्वामी सावन सिंह के बेटे राजेंद्र सिंह ने मुआयना के दौरान विरोध दर्ज करवाना शुरू कर दिया। मामले को तूल पकड़ता देख मेयर लश्कर सहित लौट आईं।
डॉ. आरके गुप्ता की फर्म में डॉयरेक्टर और खुद को रिश्तेदार कहने वाले अजय गर्ग का कहना है कि वे खुद मौके पर गए थे। डॉ. आरके गुप्ता ने गलतफहमी में दो बीघा जमीन की बात कह दी थी। दरअसल एक बीघा जमीन नगर निगम को दान में देने की बात हुई है। हमने पूर्व में भी पालिका को जमीन दान में दी थी। करीब 15 साल पहले जमीन ली गई थी। हम दस्तावेज निकलवाएंगे। नगर निगम को जमीन दी जाएगी, वह जो चाहे उपयोग करे।
मेयर अनिता ममगाईं ने बताया कि वह दान में मिली जमीन का मुआयना करने गए थे। पहले ही डॉ. आरके गुप्ता को कह दिया था कि जमीन के दस्तावेज उपलब्ध कराइए। उन्होंने अजय गर्ग को जमीन का मौका मुआयना करवाने के लिए भेजा था। भूमि के कागजात मांगे तो वे दिखा नहीं पाए। योजना है कि यदि जमीन मिल जाती है तो सामुदायिक केंद्र बनाया जाएगा। फिलहाल हम अपने स्तर पर भी पड़ताल करवाएंगे कि राजस्व अभिलेखों में उक्त जमीन किसकी है।
जमीन हमारी...दान कोई और कैसे करेगा
जमीन पर मालिकाना हक जताने वाले राजेंद्र सिंह ने बताया कि जमीन हमारी है। जमीन की रजिस्ट्री उनके पिता सावन सिंह के नाम पर है। भूमि किसी को दान में नहीं दी गई है। डॉ. आरके गुप्ता को उनके पिता ने जमीन बेची जरूर थी, लेकिन वह भूखंड कहीं और है।
डॉ. गुप्ता की जमीन जहां हो उसे दान करें या अपने पास रखें। दूसरे की जमीन पर हवाई किला बनाने की जरूरत नहीं है। बेहतर होता कि मेयर पहले दस्तावेजों की जांच करवातीं उसके बाद भूमि का निरीक्षण करने पहुंचतीं।