एक कौर भी गले से नीचे नहीं उतरा तो नारायण सिंह की पत्नी दीपा, मां मोतिमा देवी को चिकित्सकों ने ग्लूकोज चढ़ा कर बचाया। नारायण सिंह के अंतिम दर्शनों के लिए पूरा गोरी छाल क्षेत्र उमड़ पड़ा। सीलिंग के प्रधान दीवानी राम, सेरा के प्रधान नंदन सिंह, सिर्खा के देवीदत्त उपाध्याय सहित तमाम पंचायत प्रतिनिधि बरम पहुंचे। नारायण सिंह की चिता को उनके भाई देवसिंह ने मुखाग्नि दी। जवान को अंतिम विदाई देने के लिए धारचूला के एसडीएम के घाट नहीं आने पर धारचूला के विधायक हरीश धामी ने नाराजगी जताई।
नेपाल की मकालू चोटी के आरोहण के दौरान जान गंवाने वाले कुमाऊं स्काउट के जवान नारायण सिंह की अंतिम यात्रा भी दो साल पहले मिले गहरे जख्मों को कुरेद गई। जवान के पार्थिव शरीर को 400 मीटर दूर घाट तक ले जाने के लिए करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी तय की गई। कारण, दो साल पहले आई आपदा में यह 400 मीटर मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया था और तब से सुधारा ही नहीं गया।
पर्वतारोही नारायण सिंह का अंतिम संस्कार स्थानीय घाट में किया गया। बरम गांव से घाट की दूरी मात्र करीब 400 मीटर है। लेकिन शवयात्रा डेढ़ किलोमीटर घुमाकर घाट तक गई। दो वर्ष पूर्व आई भीषण आपदा में घाट को जाने वाला संपर्क मार्ग ध्वस्त होने के कारण गांव वालों को ऐसा करना पड़ा। इन दो सालों में बरम तो आपदा से तो उबर आया था लेकिन दो साल बाद नारायण सिंह के असमय निधन के रूप में मिले जख्म की पीड़ा को रास्ते की इस दुश्वारी ने और बढ़ा दिया। गांव वालों के अनुसार इन दो सालों में भी शासन-प्रशासन ने रास्ता सुधारने की सुध नहीं ली, यह अफसोस जनक है।