चैत्र नवरात्र में दुर्गा अष्टमी का पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया गया। व्रतधारियों ने कन्याओं को भोजन कराकर यथोचित दक्षिणा दी।
पौराणिक मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की गयी। अनेक स्थानों पर चल रहे शतचंडी यज्ञों एवं देवी भागवत पाठों का विधिवत समापन हुआ। नवमी के दिन भंडारों का आयोजन होगा।
बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे
हरिद्वार के प्रसिद्ध मंसा देवी, चंडी देवी, माया देवी, सुरेश्वरी देवी, दक्षिण काली, अंजनी देवी आदि मंदिरों में भक्तों की कतार लगी रही। सुरेश्वरी देवी के मंदिर में भीड़ इतनी अधिक हुई कि वाहनों को करीब दो किमी दूर बैरियर के पास ही रोक देना पड़ा।
सभी मंदिरों में चल रहे शतचंडी यज्ञ संपन्न हुए। पूर्णाहुति में शामिल होने के लिये बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। कुछ स्थलों पर नवमी के भंडारे से पूर्व होगी।
व्रतधारियों ने घर घर कन्याओं को भोग लगाया। भोजन कराने के बाद कन्याओं को विभिन्न प्रकार के वस्त्र आदि भी दिये गये। जिन घरों में नवरात्र के देवी पाठ चले रहे थे, वहां मां भगवती की आरती धूमधाम से उतारी गयी। यज्ञ में चावल के चरू से आहुतियां प्रदान की गयी।
घर-घर में पूजी गई कन्याएं
नवरात्र के आठवें दिन नगर और आसपास के क्षेत्रों में देवी महागौरी की पूजा अर्चना की गई। लोगों ने अपने घरों में हलवा पूरी का प्रसाद बनाया और देवी के रूप में कन्याओं को जिमाया। मंदिरों में भी देवी मां की पूजा अर्चना के लिए भक्तों की कतार लगी रही।
शहर और देहात के मंदिरों में दुर्गा अष्टमी के मौके पर भारी भीड़ रही। देवी मां की विशेष पूजा अर्चना की गई। लोगों ने लाइनों में लगकर हलवा, पूरी का प्रसाद देवी मां को चढ़ाया। साथ ही चुनरी, श्रृंगार का सामान भी देवी मां पर चढ़ाया।
दुर्गा चौक स्थित दुर्गा मंदिर, राम मंदिर रामनगर, काली मंदिर पुरानी तहसील, पनियाला रोड स्थित संतोषी मां मंदिर, चुड़ियाला स्थित सिद्धपीठ चूड़ामणि मंदिर आदि में पूरे दिन श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। मंदिरों में भजन कीर्तन के साथ ही हवन भी किया गया। इससे पहले लोगों ने पूजा अर्चना के बाद देवी रूपी कन्याओं को जिमाया और व्रत खोला।