देहरादून। सुनहरे भविष्य का सपने लेकर दून में पढ़ाई करने वालों पर ड्रग सिंडिकेट का शिकंजा कसता जा रहा है। सिंडीकेट युवाओं को नशे की लत लगाने के साथ ही तस्करी में भी धकेल रहा है। पुलिस के एक आंकड़े के मुताबिक तस्करी में पकड़े जाने वाले लगभग 30 फीसदी उच्च शिक्षित छात्र होते हैं।
दरअसल, ड्रग व अन्य नशे की तस्करी करने वालों के प्रमुख अड्डे दून के शिक्षण संस्थानों के आसपास ही हैं। मौज मस्ती के चक्कर में छात्र नशे की अंधी गलियों में पहुंच जाते हैं। यहां से निकलने का तो रास्ता नहीं मिलता, लेकिन इसमें बने रहने के लिए वे तस्करी का रास्ता पकड़ लेते हैं। ड्रग माफिया भी पहले इन्हें सस्ते दामों पर ड्रग मुहैया कराते हैं और आदी होने के बाद इनसे तस्करी करवाते हैं।
बीते वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो 2018 में कुल 559 पैडलरों (तस्करों) को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इनमें से 150 से ज्यादा उच्च शिक्षित युवा थे जिन्होंने हाल में पढ़ाई पूरी थी या पढ़ रहे थे। कुल गिरफ्तारियों की बात करें तो नशीले पदार्थों की तस्करी में तकरीबन 70 फीसदी युवा गिरफ्तार हुए हैं। पिछले साल ही कुल 22 छात्रों को शुरुआती दौर में चेतावनी और काउंसिलिंग के बाद छोड़ा गया था। ताकि, उनका भविष्य खराब न हो।