कोतवाली क्षेत्र का कुंजा ग्रांट स्मैक तस्करी के लिए बदनाम है। हाल यह है कि कुंजा ग्रांट में सड़क पर वाहन रुकते ही तस्कर उनकी ओर दौड़ पड़ते हैं। सभी को पता है कि यहां बड़ी आसानी से स्मैक, चरस और गांजा जैसे नशीले पदार्थ मिल जाते हैं। युवा, महिलाएं और किशोर नशे की लत लगने के बाद ड्रग पैडलर बन अपना भविष्य और सेहत दोनों को अंधकार में झोंक रहे हैं। वहीं, कोतवाली पुलिस को क्षेत्र में खुलेआम हो रही नशीले पदार्थों की बिक्री नजर नहीं आ रही है। कोतवाली क्षेत्र का कुंजा ग्रांट स्मैक, चरस और गांजा जैसे नशीले पदार्थों की तस्करी और बिक्री का गढ़ है। स्थानीय स्तर पर ड्रग पैडलर नशीले पदार्थों की बिक्री भी करते हैं। पछवादून की 10 बड़ी महिला तस्कर कुंजा ग्रांट क्षेत्र की निवासी है। महिलाओं के साथ युवा, किशोर भी नशे के मकड़जाल में फंस लत को पूरा करने और जल्द रुपये कमाने के लिए नशा बिक्री के जरायम पेशे अपना रहे हैं। संवेदनशील क्षेत्र होने के बाद भी यहां पुलिस की चेकिंग व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। एसएसपी अजय सिंह ने कोतवाली और थाना पुलिस को संवेदनशील क्षेत्र में पैदल गश्त करने के निर्देश दिए थे। लेकिन, कोतवाली पुलिस ने एक दिन गश्त कर रस्म अदायगी कर दी। बड़ा सवाल यह है कि जब नशेड़ियों को कुंजा ग्रांट पहुंचते ही आसानी से नशा उपलब्ध हो जाता है तो पुलिस को तस्कर और पैडलर नजर क्यों नहीं आते हैं। कुंजा ग्रांट में नशा तस्करी के तंत्र पर बड़ी कार्रवाई न होने से कोतवाली भी कई सवालों के घेरे में है।