इस संबंध में परिवहन सचिव शैलेश बगौली की ओर से आदेश जारी किया गया है। जिसके तहत आईडीटीआर में सभी प्रकार के वाहनों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस की परीक्षा दी जा सकेगी।
मौजूदा समय में प्रदेश में कहीं भी ऑटोमेटेड टेस्टिंग लेन नहीं है, जिसके चलते मोटर ट्रेनिंग स्कूलों की ओर से दिए गए प्रमाणपत्रों के आधार पर ही परिवहन विभाग आवेदकों को ड्राइविंग लाइसेंस जारी कर देता है।
ऐसे लोगों को भी लाइसेंस जारी हो जाता है, जिन्हें वाहन चलाना नहीं आता है। बीते दिनों सड़क सुरक्षा कमेटी की बैठक के दौरान भी इस पर चर्चा की गई थी। जिसके बाद सहायक परिवहन आयुक्त एसके सिंह व आरटीओ दिनेश चंद्र पठोई की संयुक्त कमेटी बनाई गई।
जिसमें बीते तीन अगस्त को आईडीटीआर का निरीक्षण कर रिपोर्ट बनाई गई। कमेटी ने लाइसेंस की प्रक्रिया को दो चरण में आइडीटीआर झाझरा में शिफ्ट करने का सुझाव दिया। पहले चरण में भारी व मध्यम व्यावसायिक वाहनों के आवेदकों का लाइसेंस टेस्ट तथा बाद में सभी आवेदकों के लिए लाइसेंस की प्रक्रिया वहीं पूरी करने की बात कही।
मौजूदा समय में आवेदकों को आरटीओ में लाइसेंस बनवाना पड़ता है। जिसके चलते यहां सुबह से ही लंबी कतार लग जाती है। समय की बर्बादी से बचने के लिए आवेदक दलालों का सहारा लेते हैं।
आईडीटीआर में लाइसेंस बनने से आरटीओ में भीड़ कम होगी। वहीं, अभी हल्के वाहनों के लिए सिम्युलेटर टेस्ट हो रहा था लेकिन आईडीटीआर झाझरा में परीक्षण होने से भारी व मध्यम वाहन चालकों को भी टेस्ट देना होगा।
आरटीओ में काफी भीड़ हो जाती थी। परीक्षण के लिए भी व्यवस्था नहीं थी। इसे लेकर परिवहन सचिव से लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया आईडीटीआर में कराने का अनुरोध किया गया था। जिसे लेकर शासनादेश जारी हुआ है। इससे आवेदकों को काफी राहत मिलेगी।
- डीसी पठोई, आरटीओ