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दूर हो रहे जलस्रोत, संकट में 350 पेयजल परिजोजनाएं

Tue, 19 Apr 2016 04:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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पानी का संकट - फोटो : amar ujala
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पर्वतीय क्षेत्रों में सूखे की मार से ऐसी साढ़े तीन सौ पेयजल परियोजनाओं के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है, जो आधी तैयार हो चुकी हैं। जिन जलस्रोतों पर ये पेयजल परियोजनाएं बन रही हैं, वे जलस्रोत सूख रहे हैं या अपने स्थान से खिसक गए हैं। ये पेयजल परियोजनाएं बजट की किस्तों के चक्कर में अटकी हैं। अगर परियोजनाएं चालू हो जातीं तो प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी की दिक्कत दूर हो जाती। परियोजनाओं के लिए बजट आवंटित करने के लिए शासन फिर केंद्र को पत्र लिख रहा है।
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राष्ट्रीय ग्रामीण एवं स्वच्छता कार्यक्रम के तहत प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के 95 ब्लाकों में साढ़े तीन सौ पेयजल योजनाएं शुरू की गई थीं। इन परियोजनाओं से ढाई हजार से ज्यादा गांवों को पीने का पानी मिलना था। इन परियोजनाओं का बजट साढ़े सात सौ करोड़ रुपये था। शासन ने इन परियोजनाओं का काम भी शुरू करा दिया। परियोजना के आकार के हिसाब से किस्तें भी जारी की जाती रहीं। अब तक कई परियोजनाओं का कार्य 20 फीसदी तो किसी का 75 फीसदी पूरा हो चुका है।

इन परियोजनाओं में अब तक 280 करोड़ रुपये खर्च भी हो चुके हैं। इसके बाद केंद्र और बजट के बीच खर्च का अनुपात तय न हो पाने के कारण परियोजनाओं का बजट रुक गया। बीते वित्तीय वर्ष में परियोजनाओं को सिर्फ 30 करोड़ रुपये केंद्र से मिला था। इस वित्तीय त्रैमास में परियोजनाओं के हक में कुछ नहीं हुआ है। लेकिन अब नई मुसीबत यह खड़ी हो गई है कि जलवायु परिवर्तन के कारण सूखे से इन परियोजनाओं के जलस्रोत ही खिसक रहे हैं। कई जलस्रोतों में पानी कम हुआ, कई सूख गए और कई दूर खिसक गए हैं। इससे कई परियोजनाओं में नए सिरे काम शुरू करना पड़ेगा।
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