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Uttarakhand: प्रदेश में दूषित पेयजल से होने वाली बीमारियों में भारी कमी, पेयजल विभाग-NHM की रिपोर्ट में खुलासा

Sat, 29 Apr 2023 01:16 PM IST
रेनू सकलानी आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून

सार

प्रदेश में वर्ष 2017 में डायरिया के 2,15,761 मामले दर्ज किए गए थे। इसके बाद 2018 में 2,03,973, 2019 में 1,96,111, वर्ष 2020 में 77,964, 2021 में 1,15,314 मामले दर्ज किए गए थे। 2022 में इनकी संख्या गिरकर 32,506 पर पहुंच गई।
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पानी - फोटो : pixy bay
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विस्तार
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प्रदेश में हर साल दूषित पेयजल की वजह से होने वाली बीमारियों में पहली बार भारी कमी दर्ज की गई है। पेयजल विभाग और नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) की रिपोर्ट में इसका खुलासा है। डायरिया, हेपेटाइटिस, टायफाइड, फीवर सहित तमाम बीमारियों का प्रकोप कम होने के पीछे जल जीवन मिशन से स्वच्छ जलापूर्ति को वजह बताया जा रहा है।

पांच साल में बीमारियों का ग्राफ 2022 में सबसे नीचे

प्रदेश में वर्ष 2017 में डायरिया के 2,15,761 मामले दर्ज किए गए थे। इसके बाद 2018 में 2,03,973, 2019 में 1,96,111, वर्ष 2020 में 77,964, 2021 में 1,15,314 मामले दर्ज किए गए थे। 2022 में इनकी संख्या गिरकर 32,506 पर पहुंच गई। इसी प्रकार, एंट्रिक फीवर के 2017 में 65,781 मामले थे, जिनका आंकड़ा 2022 में गिरकर 21,838 पर पहुंच गया। वायरल हेपेटाइटिस के 2017 में 8149 मामले सामने आए थे, जो कि 2022 में 946 पर पहुंच गए।

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टायफाइड के 2017 में 22,749 मामले थे, जो कि इस साल 9,154 पर पहुंच गए। वायरल हेपेटाइटिस-ए के 2017 में 217 मामले थे, जो कि 2022 में 88 रिकॉर्ड हुए। वायरल हेपेटाइटिस-ई के 2017 में 171 मामले थे, जो कि 2022 में 48 पर पहुंच गए। दूषित पेयजल की वजह से पेचिश के 2017 में 20,557 मामले थे, जो 2022 में 3016 रिकॉर्ड हुए।

2022 में जिलावार बीमारियों की स्थिति

जिला डायरिया पेचिश टाइफाइड हेपेटाइटिस एंट्रिक फीवर
अल्मोड़ा 2286 151 1149 56 1568
बागेश्वर 250 36 67 02 211
चमोली 777 319 911 06 950
चंपावत 163 18 317 00 1274
देहरादून 3114 271 75 11 348
हरिद्वार 5349 195 388 51 1206
नैनीताल 2279 322 166 546 2688
पौड़ी गढ़वाल 5721 738 1024 178 4496
पिथौरागढ़ 499 132 1498 28 6785
रुद्रप्रयाग 1195 165 768 00 271
टिहरी गढ़वाल 877 88 211 02 375
ऊधमसिंह नगर 1953 187 193 46 1462
उत्तरकाशी 3543 394 210 20 204
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2000 गांवों तक पहुंचा नल से जल

पेयजल विभाग के मुताबिक, प्रदेश के 2000 गांवों तक नल से जल पहुंच रहा है। इनमें से 1000 गांव तो ऐसे हैं, जहां योजना पूर्णता के साथ चल रही है। अन्य एक हजार में 15 दिन के भीतर सभी काम पूरे हो जाएंगे। पांच जून को विश्व पृथ्वी दिवस के मौके पर पेयजल विभाग जल जीवन मिशन की इन योजनाओं का लोकार्पण कराएगा। सचिव पेयजल नितेश झा के मुताबिक, इसके बाद हर महीने 1000 गांवों में नल से जल पहुंचाया जाएगा।

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केंद्र सरकार ने जब 2019 में जल जीवन मिशन की शुरुआत की थी, उस वक्त राज्य के 1,30,325 घरों में नल से जल पहुंचता था। आज प्रदेश के 11 लाख 52 हजार घरों तक नल लग चुके हैं। कुल 14 लाख 94 हजार 160 घरों तक नल से जल पहुंचाया जाना है। निश्चित तौर पर स्वच्छ जल आपूर्ति की वजह से जल जनित रोगों में यह गिरावट दर्ज की गई है। - नितेश झा, सचिव, पेयजल

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