भाबर की लाइफलाइन बहुउद्देश्यीय जमरानी बांध परियोजना की 2584.10 करोड़ रुपये की फाइनल डीपीआर को केंद्रीय जल आयोग ने मंजूरी दे दी है। अब 11 फरवरी को बांध परियोजना को लेकर नई दिल्ली में तकनीकी सलाहकार समिति (टीएसी) की बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में बांध परियोजना को अंतिम मंजूरी मिलने की उम्मीद है। मंगलवार को केंद्रीय जल आयोग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में बांध परियोजना की लागत को मंजूरी देकर आखिरी बाधा भी दूर कर दी गई है।
जमरानी बांध परियोजना के एसई संजय शुक्ल विभागीय अधिकारियों के साथ पिछले एक हफ्ते से दिल्ली में बांध परियोजना की डीपीआर को अंतिम रूप देने में लगे थे। बराबर मुख्य अभियंता दफ्तर के संपर्क में थे। सिंचाई अधिकारियों के अथक प्रयास के बाद सोमवार को केंद्रीय जल आयोग ने डीपीआर की लागत 2584.10 करोड़ (फाइनल कॉस्ट) को मंजूरी दे दी। एसई शुक्ल ने बताया कि केंद्रीय जलायोग के अधिकारियों ने 11 फरवरी को टीएसी की बैठक में जमरानी परियोजना को मंजूरी देने के संकेत दिए हैं।
वर्ष 1975 में इस परियोजना को सैद्धांतिक सहमति मिली। परियोजना के लिए तत्कालीन लागत 61.25 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। इस परियोजना के तहत गौला बैराज, 244 किमी नहरों, जमरानी कॉलोनी का निर्माण किया गया। इसमें करीब 25.24 करोड़ रुपये खर्च हुए। तब से लगातार परियोजना पर कई आपत्तियां लगती रहीं। आपत्तियों का निस्तारण कराने में सिंचाई विभाग को 43 साल बीत गए।
जमरानी बांध परियोजना की संशोधित डीपीआर 2584.10 करोड़ की लागत को केंद्रीय जलायोग ने मंजूरी दे दी है। केंद्रीय जलायोग के अधिकारियों से इसे केंद्रीय परियोजना में शामिल करने के संकेत मिले हैं। अब 11 फरवरी को बांध परियोजना को टीएसी की मंजूरी मिल जाएगी।
- मोहन चंद्र पांडेय, मुख्य अभियंता सिंचाई विभाग
डीपीआर में आए कई उतार-चढ़ाव
- जमरानी बांध परियोजना को 1975 में सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने के बाद 61.25 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।
- सिंचाई विभाग ने 1981 में गौला बैराज का निर्माण किया। बैराज, 440 किमी नहरों, जमरानी कॉलोनी आदि के निर्माण में 25.24 करोड़ रुपये खर्च किए।
- 1989 में 144.84 करोड़ रुपये की डीपीआर भेजी भेजी गई। इस बीच बांध परियोजना की स्वीकृति में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की तमाम आपत्तियां लगती रहीं।
- 2015 में परियोजना की लागत 2350 करोड़ रुपये पहुंच गई।
- 20 जुलाई 2018 में 2850 करोड़ रुपये की डीपीआर संशोधित कर 2573.10 करोड़ की डीपीआर केंद्रीय जलायोग को सौंपी गई है।
- फिर 2800 करोड़ की नई डीपीआर केंद्रीय जलायोग को सौंपी।
- जनवरी 2019 में 2954.45 करोड़ रुपये की डीपीआर सौंपी।
- चार फरवरी 2019 को 2584.10 करोड़ रुपये की डीपीआर पर लगी मंजूरी की मुहर।