तीन चरणों में काम पूरा ही नहीं कर पाई कंपनी : निगम
नगर निगम इस पूरे मामले पर अपने रुख पर कायम है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाख खन्ना का कहना है कि टेंडर की जो भी शर्तें थीं, उन्हें कंपनी पूरी नहीं कर पाई। की-परफॉर्मिंग इंडिकेटर (केपीआई) के पैमानों पर कंपनी खरी ही नहीं उतरी। उन्होंने बताया कि कंपनी को तीन चरणों में काम करना था।
पहले चरण में सभी मशीनें लगाने का काम पूरा करना था। जब उन्होंने कार्यभार संभाला और शीशमबाड़ा प्लांट में आग की घटना पर वह जांच करने गए तो पता चला कि सभी मशीनें चल ही नहीं रही थीं। उन्होंने बताया कि दूसरे चरण में कंपनी को डोर-टु-डोर कूड़ा कलेक्शन 100 प्रतिशत घरों से करना था, जिसे कंपनी कभी पूरा नहीं कर पाई। शर्तें पूरी न करने की वजह से ही कंपनी हर महीने जो बिल देती थी, उसमें 20 फीसदी कटौती कर दी जाती थी।
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कूड़ा उठता रहा, जुर्माना लगता रहा
रैमकी कंपनी का दावा है कि उसने शहर की स्वच्छता बढ़ाने के लिए पूरा सेटअप लगाया था। कूड़ा निस्तारण का काम भी तेजी से किया गया। इन चार वर्षों में कंपनी पर कम से कम दस बार जुर्माना लगाया गया। पहले से ही कंपनी को भुगतान पूरा नहीं हुआ, ऊपर से जुर्माना भी लादा गया। बावजूद इसके व्यवस्थाएं आज भी जस की तस हैं।