यह है मामला
जब दस साल पुराने विक्रमों को हटाकर उनकी जगह नए टाटा मैजिक लगाने का फैसला राज्य परिवहन प्राधिकरण की बैठक में लिया गया। यह भी तय हुआ कि एक अप्रैल से विक्रम संचालक अपने कांट्रैक्ट कैरिज के परमिट की शर्तों का पालन करेंगे। जबकि, स्टेज कैरिज में मैजिक संचालक सवारी बिठाएंगे। एक अप्रैल से दस साल पुराने विक्रमों को चलन से बाहर किया जाना था। इसमें हाईकोर्ट ने स्टे दे दिया। इससे विक्रम संचालक राहत मिली, लेकिन फुटकर सवारी नहीं बिठा पाने की बाध्यता उनके लिए मुश्किल खड़ी करेगी।
विक्रम को नहीं दे सकते फुटकर सवारी का लाइसेंस
देहरादून महानगर सिटी बस सेवा महासंघ के अध्यक्ष विजयवर्धन का कहना है कि 12 सवारियों से नीचे की क्षमता वाली गाड़ियों को स्टेज कैरिज का परमिट नहीं दिया जा सकता। 13 प्लस 1 की क्षमाता वाली गाड़ियों को यह परमिट दिया जाता है। मोटर व्हीकल एक्ट में यह स्पष्ट तौर पर लिखा है। इसके मुताबिक विक्रम और टाटा मैजिक को स्टेज कैरिज का परमिट नहीं दिया जा सकता।
यह है अंतर
मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार स्टेज कैरिज परमिट धारक वाहन एक स्थान से अपनी यात्रा शुरू करता है। अंतिम गंतव्य बिंदु तक इसमें कई स्टापेज हो सकते हैं। जबकि कॉन्ट्रैक्ट कैरिज में बुकिंग कर एक स्थान से निर्धारित गंतव्य तक सवारी को ले जाया जाता है। इसमें बीच में वाहन को नहीं रोका जाता।