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Dehradun News: कीमो और टारगेट थेरेपी पर शोध करेगा दून अस्पताल

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कैंसर के मरीजों के इलाज के लिए कीमोथेरेपी और टारगेट थेरेपी दी जाती है। कैंसर को खत्म करने में यह दोनों थेरेपी कारगर हैं। यह थेरेपी इलाज में फायदेमंद जरूर होती हैं लेकिन इनके कुछ साइड इफेक्ट भी हैं। इसका पता लगाने के लिए दून अस्पताल का कैंसर रोग विभाग शोध करेगा। शोध के दौरान यह पता किया जाएगा कि कीमोथेरेपी और टारगेट थेरेपी से मरीज को कितना नुकसान हो सकता है।
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दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के कैंसर रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दौलत सिंह ने बताया कि विभाग की ओर से यह जल्द ही यह शोध शुरू किया जाएगा। इस शोध कार्य में विभाग की पूरी टीम का सहयोग रहेगा और विभाग में इलाज के लिए आने वाले मरीजों पर ही यह शोध किया जाएगा। हर बीमारी की दवा उपलब्ध है लेकिन हर दवा का कुछ न कुछ साइड इफेक्ट जरूर होता है। शोध के दौरान साइड इफेक्ट पता किए जाएंगे। इससे पता चल सकेगा कि साइड इफेक्ट कम करने या खत्म करने के लिए क्या किया जा सकता है।

क्या है कीमो और टारगेट थेरेपी

डॉ. दौलत सिंह ने बताया कि कैंसर का पता लगाने के बाद एडवांस स्टेज में उसे कीमोथेरेपी देकर छोटा किया जाता है। इसके बाद सर्जरी करके ऑपरेट किया जाता है। रेडियोथेरेपी देने के बाद उसकी जड़ों को खत्म किया जाता है। इसके दोबारा कैंसर उभरने की संभावना नहीं रहती है। शरीर के अन्य अंगों में फैले हुए कैंसर को ट्रीट करने के लिए भी कीमोथेरेपी दी जाती है। इसके अलावा कैंसर कारक प्रोटीन जो कैंसर को बढ़ावा देते हैं उसे टारगेट थेरेपी नष्ट करती है ताकि भविष्य में कैंसर न हो पाए। इससे कैंसर बनने पर रोक लग सकती है। कीमोथेरेपी पूरे शरीर की कोशिकाओं पर और टारगेट थेरेपी सिर्फ कैंसर कोशिकाओं पर ही असर दिखाती है।
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यह हो सकते हैं साइड इफेक्ट



- बाल का गिरना

- खून की सफेद कणिकाओं में कमी आना



- एलर्जी होना

- दवाएं महंगी होना
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