प्रदेश के सबसे बडे़ सरकारी अस्पतालों में शुमार राजकीय दून मेडिकल अस्पताल में डॉक्टर, स्टाफ की कमी, चिकित्सीय जांच की विभिन्न मशीनों के खराब होने, दवाओं की कमी, मरीजों से कई बार अच्छा व्यवहार न होने और दलालों की सक्रियता के लिए विवादों में रहता है। इसका सीधा असर मरीजों और तीमारदारों पर पड़ता है।
फिलवक्त अस्पताल में लंबे समय से एंटी रैबीज के इंजेक्शन नहीं हैं। सीटी स्कैन मशीन भी करीब नौ महीने से खराब है। इसके चलते मरीजों को निजी अस्पतालों से महंगी दरों पर जांचें और बाजार से इंजेक्शन की खरीद करनी पड़ रही हैं। अमर उजाला टीम ने बृहस्पतिवार को दून अस्पताल की स्थिति का जायजा लिया।
सुबह नौ बजे
अस्पताल के मुख्य परिसर में कुछ कर्मचारी आने शुरू हो गए हैं। ठंड की वजह से अभी मरीजों की संख्या बहुत कम नजर आ रही है। डॉक्टरों की ओपीडी खुलनी शुरू हुईं और गार्ड भी पहुंच चुके थे। साथ ही मरीज पंजीकरण कक्ष भी खुल गया।
सुबह 9:30 बजे
अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। ज्यादातर ओपीडी कक्ष में डॉक्टर नहीं है। बाहर मरीज खड़े हैं और अंदर ओपीडी में सन्नाटा पसरा है। कुछ ओपीडी में जूनियर डॉक्टर बैठे हैं। जो गंभीर मरीजों को सीनियर डॉक्टरों को दिखाने की सलाह देते हैं।
सुबह 10:30 बजे
मरीजों की लाइन बढ़ चुकी है। कई ओपीडी में अब भी डॉक्टर नदारद हैं और बाहर मरीज डॉक्टर का आने इंतजार कर रहे हैं। उधर, अस्पताल के एमएस डॉ. केके टम्टा इमरजेंसी, ओपीडी, सीटी स्कैन, एक्सरे और एमआरआई कक्ष का निरीक्षण कर रहे हैं। जिन ओपीडी में डॉक्टर नहीं हैं, उनमें कुछ के ऑपरेशन थियेटर, कुछ के वार्ड राउंड और कुछ के इमरजेंसी मीटिंग में होने की बात गार्ड मरीजों को बता रहे हैं।
सुबह 10:45 बजे
अमर उजाला की टीम न्यूरो की ओपीडी में पहुंची। इसी वक्त अस्पताल में बिजली गुल हो गई है। करीब पांच मिनट बाद भी बिजली नहीं आई। मरीज मोबाइल की रोशनी में अपने पर्चे देख रहे हैं। जनरेटर से बिजली सुचारू तरीके से चालू होने में करीब 10 मिनट का वक्त लग गया।
पूर्वाह्न 11:30 बजे
सिर की चोट और अन्य कुछ मरीजों को डॉक्टर सीटी स्कैन कराने की सलाह देते हैं, लेकिन मरीज सीटी स्कैन के लिए भटक रहे हैं। मरीजों को बताया जा रहा है कि अस्पताल की सीटी स्कैन मशीन करीब नौ महीने से खराब है। इस दौरान एक्सरे और अल्ट्रासाउंड कक्ष की तरफ बड़ी संख्या में मरीज और उनके तीमारदार अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
अपराह्न तीन बजे
अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष में डॉक्टर और अन्य स्टाफ धरनास्थल से पुलिस द्वारा लाए गए अनशनरत आयुष छात्र का चेकअप कर रहे हैं। इस दौरान इमरजेंसी में भर्ती दूसरे मरीजों को देखने के लिए डॉक्टर और स्टाफ की कमी महसूस हो रही थी। इस दौरान एक बार फिर अस्पताल की बिजली गुल हुई। जो कुछ मिनट बाद बहाल हो गई।
बहन का ऑपरेशन होना है। यहां पर इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं है। निजी अस्पताल से उपचार कराना पड़ेगा। मैं भी अपना अल्ट्रासाउंड कराने के लिए इंतजार कर रही हूं।
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नीतू पासवान, लक्खीबाग
सहारनपुर से बेटे को इलाज के लिए लेकर आए हैं। बच्चे की तबीयत कई बार ज्यादा बिगड़ जाती है। डॉक्टर ने जांच कराने के लिए कहा है। स्ट्रेचर नहीं मिला तो बेटे को गोद में ले जा रहा हूं।
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मुर्सलीन, सहारनपुर
अपने दोस्त को इलाज के लिए लाया हूं। डॉक्टर ने एमआरआई की सलाह दी है। यहां पर बताया गया है कि सीटी स्कैन मशीन खराब है। मजबूरी में बाहर से महंगे दाम पर जांच करानी पड़ूेगी।
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राजेश, जोगीवाला
क्या कहते हैं अधिकारी
दून अस्पताल के चिकित्स अधीक्षक डॉ. केके टम्टा का कहना है कि अस्पताल में सभी डॉक्टरों और स्टाफ को निर्धारित समय पर पहुंचने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। सुबह के समय डॉक्टर कुछ समय के लिए वार्ड में राउंड पर रहते हैं। रोटेशन में कुछ डॉक्टर ऑपरेशन थियेटर और कुछ डॉक्टरों की ड्यूटी टीचिंग में रहती है। जहां तक एंटी रैबीज के इंजेक्शन न मिलने का सवाल है तो यह बाजार में भी बहुत कम मिल पा रहा है।
कई बार टेंडर डालने के बावजूद किसी फर्म ने आवेदन नहीं किया है। सीटी स्कैन मशीन के लिए प्रस्ताव करीब नौ महीने पहले शासन को भेजा जा चुका है। शासन स्तर से इसकी खरीद की स्वीकृति मिलनी बाकी है। बिजली गुल होने पर सुविधा के लिए ऑटोमेटेड जनरेटर लगे हैं। इनसे बिजली सुचारू रूप से बहाल होने में कुछ समय लगता है।