दून अस्पताल में तैयार बर्न यूनिट
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दून अस्पताल में पांच बेड के आईसीयू सहित बर्न यूनिट दो महीने से बनकर तैयार है, लेकिन इसे शुरू करने के लिए शुभ मुहूर्त का इंतजार किया जा रहा है। ऐसे में आग या करंट से झुलसे मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहीं कोरोनेशन अस्पताल में बर्न आईसीयू और प्लास्टिक सर्जन नहीं होने से भी मरीजों को परेशानी हो रही है।
चमोली में करंट लगने से 16 लोगों की मौत की घटना पूरे उत्तराखंड को हिला कर रख दिया है। इस घटना में झुलसे अन्य लोगों को उपचार के लिए ऋषिकेश एम्स ले जाया गया, क्योंकि अन्य जगह बर्न यूनिट की सुविधा ही नहीं थी। यानि प्रदेश में कहीं कोई बड़ा हादसा होता है तो इससे निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।
दरअसल प्रदेश में झुलसे हुए मरीजों के लिए सरकारी अस्पतालों में सिर्फ ऋषिकेश एम्स और दून के कोरोनेशन अस्पताल ही इंतजाम हैं। कोरोनेशन अस्पताल में 10 बेड की बर्न यूनिट है, लेकिन यहां बर्न आईसीयू नहीं हैं। हालांकि दून अस्पताल में बर्न यूनिट तैयार है। अस्पताल में प्लास्टिक सर्जन भी है, लेकिन इसके बावजूद इसे शुरू नहीं किया जा रहा है।
आईसीयू के लिए जगह ही नहीं
कोरोनेशन अस्पताल की प्रमुख चिकित्सा चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शिखा जंगपांगी ने बताया कि अस्पताल में बर्न यूनिट बने पांच साल हो गए। बर्न यहां आईसीयू के लिए जगह ही नहीं है। अस्पताल में चार जनरल सर्जन हैं। इसमें तीन परमानेंट और एक संविदा पर कार्यरत हैं। हालांकि अस्पताल में प्लास्टिक सर्जन भी नहीं हैं। बर्न यूनिट के मरीज को आईसीयू की जरूरत पड़ती है तो उसे अन्य मरीजों के आईसीयू में रखना पड़ता है। अन्य मरीजों के लिए अस्पताल में 10 बेड का आईसीयू है। मरीज आयुष्मान कार्ड धारक है तो उसको निशुल्क इलाज मिलता है। अन्यथा अस्पताल का चार्ज लिया जाता है। बर्न यूनिट में रोजाना पांच, छह मरीज भर्ती रहते हैं।
बर्न यूनिट में सर्जन भी कर सकता इलाज
दून अस्पताल के प्लास्टिक सर्जन डॉ. मोहित गोयल कहते हैं कि बर्न यूनिट के लिए प्लास्टिक सर्जन होना जरूरी नहीं है जनरल सर्जन को भी ट्रेनिंग दी जाती है और वह भी जले हुए मरीजों का इलाज कर सकते हैं। दून अस्पताल में बर्न यूनिट के लिए ओटी, वार्ड और आईसीयू तैयार है। यहां पर प्लास्टिक सर्जन के साथ ही पूरा सर्जरी विभाग है।
बर्न यूनिट शुरू करने के लिए लगभग सभी तैयारियां पूरी हो गई हैं। एक-दो सप्ताह में अस्पताल में इसे शुरू कर दिया जाएगा।
- डॉ. धनंजय डोभाल, डिप्टी एमएस, दून अस्पताल