उत्तरांखड और यूपी के हिस्से में आधी-आधी बंटी हैं सुरंगें
डाट काली क्षेत्र में मौजूद तीनों मौजूदा सुरंगों का दिलचस्प पहलू यह है कि यह तीन सुरंगें आधी उत्तराखंड तो आधी उत्तर प्रदेश में हैं। दोनों राज्यों की सीमा रेखा सुरंगों के बीच से होकर गुजरती है।
10 करोड़ कम लागत में बनी है नई सुरंग
डाटकाली क्षेत्र में पहले बनी सुरंग (जिस पर वर्तमान में ट्रैफिक गुजर रहा) करीब 80 करोड़ रुपये की लागत से बनी थी, जबकि नई सुरंग 70 करोड़ की लागत से बनी है। इस सुरंग की चौड़ाई और ऊंचाई भी पहले वाली सुरंग से ज्यादा है।
सुरंग के दोनों छोर पर बने मुहानों का किया जाएगा सौंदर्यीकरण
एक्सप्रेस-वे के तहत बनी नई और पुरानी दोनाें सुरंगों के दोनों छोर पर बने मुहानों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इसके तहत दोनों तरफ सुंदर फूल और पत्तियों वाले पौधे लगाए जाएंगे। इनको कुछ इस तरह से डिजाइन किया जाएगा कि इनमें उत्तराखंड की संस्कृति की झलक के साथ ही आधुनिक भारत की तस्वीर भी दिखे।
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डाट काली क्षेत्र में 200 साल पहले बनी थी पहली सुरंग
डाट काली क्षेत्र में दो नई सुरंगों के निर्माण के बाद भी पुरानी और सबसे पहली सुरंग का अपना अस्तित्व और महत्व बना रहेगा। देहरादून की तरफ से डाट काली मंदिर जाने के लिए पुरानी वाली सुरंग का ही इस्तेमाल होगा। डाट काली मंदिर की पहली सुरंग का निर्माण वर्ष 1821-23 के बीच किया गया था। तब देहरादून के तत्कालीन असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट एफजे शोर ने इसका निर्माण कराया था। उस समय सहारनपुर जिले को राजपुर, मसूरी से जोड़ने के लिए इस सुरंग का निर्माण कराया गया था। आज दो सौ साल बाद भी सुरंग अच्छी स्थिति में है और आने वाले समय में भी इसका अस्तित्व बना रहेगा।