परिवारों में यही धारणा-लड़कों से नहीं लेंगे किडनी
किडनी की अधिकतर बीमारियों में लिंग भेद नहीं है। किडनी दान करने में भारत में लिंग भेद देखा गया है। किडनी दान में ज्यादातर माताएं, बहनें व पत्नियां शामिल हैं। हिंदुस्तानी परिवेश के परिवारों में यही धारणा है कि लड़कों से किडनी नहीं लेंगे। समाज में धारणाएं जो बनी हुई हैं, अगर डोनेशन से कुछ होगा तो लड़के को नहीं होना चाहिए लड़की को भले ही हो जाए। दूसरा कारण कि प्रकृति ने महिलाओं को ज्यादा भावुक और ममतामयी बनाया है, इसलिए वह अपने परिवार और परिजनों के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार रहती हैं। आमतौर पर देखा गया है कि अगर एक दंपती है, तो उसमें से पत्नी से उम्मीद की जाती है, लेकिन पति से उम्मीद नहीं की जाती है।
डॉ. पुनीत अरोड़ा, प्रिंसिपल कंसलटेंट, किडनी ट्रांसप्लांट एवं नेफ्रोलॉजी, मैक्स अस्पताल
जरूरी प्रक्रिया के बाद कर सकते दान
किडनी दान रक्त संबंधी पति-पत्नी, नजदीकी रिश्तेदार कर सकते हैं। किडनी दान करने वाला पूरी तरह से स्वस्थ होना चाहिए। 18 साल से ऊपर और 65-70 साल तक के इंसान ही किडनी दान कर सकते हैं। एक किडनी दान करने पर भी दाता और मरीज दोनों का जीवन आसानी से चल सकता है। किडनी दान को लेकर राज्य सरकार ने डीजी हेल्थ की अध्यक्षता में कमेटी बनाई है। अस्पताल की ओर से दस्तावेज भेजे जाने के बाद कमेटी कई पहलुओं की जांच करती है। अनुमति के बाद ही किडनी प्रत्यारोपण किया जाता है।
- डॉ. आलोक कुमार, वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट, श्रीमहंत इंदिरेश अस्पताल
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नसबंदी कराने में भी महिलाएं पुरुषों की तुलना में आगे
नसबंदी से लेकर अंग दान तक में महिलाएं ही आगे हैं। नसबंदी जैसे छोटे से ऑपरेशन में भी पुरुष हिचकते हैं, जबकि आंकड़े दर्शाते हैं कि नसबंदी कराने में भी महिलाएं पुरुषों की तुलना में बहुत आगे हैं। अधिकतर महिलाएं बड़ा दिल दिखाती हैं। महिलाएं ज्यादा भावनात्मक होती हैं। बात अगर शराब के सेवन और धूम्रपान जैसे व्यसनों की करें तो इसमें पुरुष आगे नजर आते हैं।
- डॉ. मनोज उप्रेती, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, देहरादून