ईष्ट देव सेवा समिति के संस्थापक आचार्य सुरेंद्र प्रसाद सुंदरियाल महाराज ने कहा है कि 21 दिवसीय मां धारी देवी डोली यात्रा का आयोजन 13 जनवरी से दो फरवरी तक होगा। यह यात्रा दून से चलकर दिल्ली, हरियाणा व उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों से होकर प्रयागराज से वापस आएगी। यात्रा के दौरान देवभूमि की संस्कृति के बारे में जागरूक करेंगे।
शुक्रवार को प्रेस क्लब में आचार्य सुदरियाल ने बताया कि प्रस्थान से पूर्व डोली की पूजा अर्चना मां धारी देवी पुजारी न्यास के अध्यक्ष सच्चिदानंद पांडेय करेंगे। जिसमें उत्तराखंड के वाद्य यंत्र ढोल-दमाऊ, डौंर, थाली के पारंपरिक जागरों, भजनों, मां धारी देवी के जयकारों के संग देव डोली नगर निगम हॉल से शुरू होकर शहीद स्थल तक नगर परिक्रमा करते हुए यात्रा शुरू करेगी। 15 जनवरी को मकर संक्रांति पर देव डोली हरिद्वार में गंगा स्नान करेगी। फिर रुड़की, मेरठ, साहिबाबाद, दिल्ली, फरीदाबाद और कानपुर में उत्तराखंड की देव संस्कृति पर आधारित कार्यक्रमों द्वारा परंपरागत लोक वाद्य यंत्रों द्वारा उत्तराखंड की संस्कृति का प्रचार-प्रसार और देवी देवताओं की कथा का आह्वान किया जाएगा।
आचार्य सुंदरियाल ने कहा कि यात्रा में कन्या भ्रूण हत्या, स्वच्छ भारत अभियान, निर्मल गंगा, पलायन, स्वरोजगार और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ आदि के बारे में प्रेरित किया जाएगा। 29 जनवरी को प्रयागराज में बसंत पंचमी को मां की देव डोली स्नान करेगी और एक फरवरी को श्रीनगर गढ़वाल सिद्धपीठ मां धारी देवी मंदिर में पहुंचेगी। जहां डोली की पूजा अर्चना मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य लक्ष्मी प्रसाद पांडेय करेंगे। दो फरवरी को वहां पर भंडारे का आयोजन होगा। उसके बाद मां की देव डोली अपने स्थान नेहरू कॉलोनी देहरादून के लिए प्रस्थान करेगी।
प्रेस कांफ्रेंस में उत्तराखंड साहित्य कला परिषद के उपाध्यक्ष घनानंद गगोड़िया, समिति के मनोज उनियाल, दिगंबर प्रसाद सुंदरियाल, आचार्य मधुसूदन जुयाल, राजदीप भट्ट, नितिन सेमवाल, सितांबर पंवार, गंभीर सिंह राणा, मनोज धस्माना, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के जिला अध्यक्ष प्रदीप कुकरेती, रामलाल खंडूरी, चंद्रकांता बेलवाल आदि उपस्थित थे।