शहरवासियों को अभी कुछ और समय कुत्तों के आतंक से दो-चार होना पड़ सकता है। पीड़ित लोगों की शिकायतों के बाद कुत्तों का ऑपरेशन (नसबंदी) करने की वैकल्पिक व्यवस्था बनाने वाले नगर निगम में अब इससे हाथ खींच लिए हैं। ऐसे में उम्मीद है तो कुत्तों के लिए बनाए जाने वाले अस्पताल एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) से। हालांकि, इसे बनने में छह से सात माह लग सकते हैं। इसका निर्माण कार्य करीब 10 दिन से शुरू हो चुका है।
अभी देखरेख की नहीं है व्यवस्था
नगर निगम के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीके सती ने बताया कि कुत्तों के आतंक से परेशान लोगों की शिकायतों के बाद पहले ऑपरेशन की वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी।
ऑपरेशन के बाद कम से कम तीन दिन देखरेख की जरूरत होती है, लेकिन हमारे पास देखरेख की व्यवस्था नहीं है। बरसात में इंफेक्शन का खतरा होता है। इसलिए सावधानी रखनी पड़ती है। समस्या के समाधान के लिए अस्पताल बनने का इंतजार करना पडे़गा।
पांच साल पहले की गई थी घोषणा
नगर निगम ने केदारपुरम में एबीसी बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसकी घोषणा नगर निगम ने वर्ष 2010 में की थी। दरअसल, वर्ष 2010 में भंडारी बाग में एक बच्चे की कुत्ते के काटने के बाद मृत्यु हो गई थी। इस घटना से शहरवासियों में नगर निगम के प्रति बेहद गुस्सा था। निगम ने इसके बाद कुत्तों से निजात दिलाने के लिए अस्पताल बनाने की घोषणा की थी।