कुत्तों के झुंड के हमले से लोग दहशत में हैं।
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रुड़की क्षेत्र में सुबह के समय खेत जा रहे एक किसान पर कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। हमले में किसान गंभीर रुप से घायल हो गया। ग्रामीणों ने बमुश्किल लाठी डंडो से कुत्तों को खदेड़ा। किसान को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
रुड़की क्षेत्र के रामपुर गांव निवासी शमीम (35) पुत्र मेहताब शनिवार सुबह गांव के बाहर स्थित खेत पर काम करने जा रहा था। लेकिन रास्ते में अचानक ही खूंखार कुत्तों के एक झुंड ने किसान पर हमला बोल दिया। किसान के चिल्लाने की आवाज सुनकर कुछ ग्रामीण तुरंत ही लाठी डंडों के साथ वहां पहुंचे। ग्रामीणों ने लाठी-डंडों से कुत्तों को खदेड़ा।
इसके बाद किसान को लहूलुहान हालत में सिविल अस्पताल में लाया गया। चिकित्सकों ने बताया कि किसान के हाथ-पांव आदि का मांस बुरी तरह से फटा हुआ है। शरीर में जगह-जगह कुत्तों के दांतों के गहरे निशान है। किसान को अभी होश नहीं आया है। किसान का हालचाल जानने के लिए विधायक फुरकान अहमद अस्पताल पहुंचे।
गुलदार से भी ज्यादा खतरनाक हैं ये कुत्ते
कुत्ते झुंड में हमला कर रहे हैं।
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रामपुर गांव में शुक्रवार सुबह जिस तरह से किसान पर खूंखार कुत्तों के झुंड ने हमला किया है। उसके बाद से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। इस हमले को देखकर हर कोई यही कह रहा है कि ये कुत्ते तो गुलदार से भी ज्यादा खतरनाक है।
रामपुर गांव के जंगल में पिछले कुछ दिनों में तीन लोगों की मौत हो चुकी है।
हमले में मरने वालों को देखकर हर कोई यही कह रहा था कि गुलदार ने इन लोगों को अपना शिकार बनाया है। इसी गांव के जंगल में एक और व्यक्ति का भी शव मिला था। इसे भी किसी जंगली जानवर से अपना शिकार बनाया था। सभी लोग यह मान रहे थे कि गुलदार ने ही यह हमला किया है।
शनिवार को जिस तरह से किसान शमीम पर कुत्तों के झुंड ने हमला किया है। उसके बाद अब ग्रामीणों में चर्चा है कि कहीं पहले भी इन कुत्तों ने ही तो हमला नहीं किया था। ग्रामीणों में अब गुलदार से ज्यादा खूंखार कुत्तों का खौफ ज्यादा नजर आ रहा है।
झुंड में रहने से कुत्ते हो जाते हैं आक्रामक
अस्पतालों में रैबीज के इंजेक्शन भी नहीं हैं।
पशु चिकित्सक ने बताया कि जो कुत्ते जंगल में झुंड बनाकर रहते हैं वह अक्सर आक्रामक हो जाते हैं। जिससे छोटे जानवरों के साथ ही कई बार इंसानों पर भी हमला कर देते हैं। झुंड में होने की वजह से यह बेहद घातक हो जाते हैं।
नहीं आए एंटी रैबीज इंजेक्शन
सिविल अस्पताल में आने वाले कुत्तों के काटने के शिकार लोगों की मुश्किलें कम नहीं हो पा रही है। अस्पताल में आकर पता चलता है कि इंजेक्शन फिर खत्म हो गए। जिसके कारण लोगों को मजबूरन बाहर मेडिकल स्टोर से इंजेक्शन खरीदने पड़ रहे हैं। शनिवार को भी एंटी रैबीज इंजेक्शन न आने से 50 से अधिक लोग निराश होकर लौट गए।
सिविल अस्पताल रुड़की में पिछले छह माह से एंटी रैबिज इंजेक्शन को लेकर लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। पिछले दिनों लंबे इंतजार के बाद 500 एंटी रैबीज इंजेक्शन आए थे लेकिन दस दिन के भीतर ही यह इंजेक्शन समाप्त हो गए। इसके बाद फिर से डेढ़ सौ इंजेक्शन आए। लेकिन दो-तीन दिन के भीतर ही यह भी खत्म हो गए। शुक्रवार से एंटी रैबिज इंजेक्शन अस्पताल में खत्म है।