दून मेडिकल कॉलेज, अस्पताल में चिकित्सकों को अब एक निश्चित समय अवधि तक काम करना जरूरी होगा। इसके लिए उन्हें एक बॉन्ड भरना होगा। ऐसे में डॉक्टर निश्चित अवधि के बाद शासन-प्रशासन की अनुमति से ही नौकरी छोड़ सकेंगे। अस्पताल प्रशासन ने शासन स्तर पर इसके लिए कार्ययोजना बनानी शुरू कर दी है। चिकित्सकों के नौकरी छोड़ने से मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है।
दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना का कहना है कि कुछ डॉक्टर बिना किसी विवाद के नौकरी छोड़कर निजी अस्पताल चले जाते हैं। ऐसे में मरीजों का इलाज प्रभावित होता है। हालांकि, अस्पताल में डॉक्टरों की सैलरी को लेकर समस्या है। ऐसे में सैलरी बढ़ाई जाने की बात चल रही है। दरअसल, अस्पताल में पिछले छह महीने में कई डॉक्टर नौकरी छोड़कर जा चुके हैं। इससे मरीजों का इलाज प्रभावित हुआ है। विभागों की व्यवस्था गड़बड़ा गई है।
चिकित्सकों की कमी से सुपर स्पेशलिटी वाले विभाग चलाना मुश्किल हो गया है। वहीं, कुछ डॉक्टरों ने निराशा व्यक्त करते हुए बताया कि एक डॉक्टर पर अधिक भार डाल दिया जाता है। इससे भी डॉक्टर नौकरी छोड़कर जा रहे हैं।
नाम और प्रसिद्धि के लिए नौकरी करने आते हैं डॉक्टर
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अधिकतर डॉक्टर नाम और प्रसिद्धि के लिए यहां नौकरी करने आते हैं और यह सब मिलते ही नौकरी छोड़ देते हैं। पिछले दिनों यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, गायनी, मेडिसिन, टीबी एंड चेस्ट, नेत्र रोग आदि विभागों के डॉक्टर नौकरी छोड़ चुके हैं।