देहरादून में अब चिकित्सकों ने शासन स्तर पर लंबित मांग प्रस्तावों के विरोध में आंदोलन की तैयारी कर ली है।
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प्रोन्नति, डीएसीपी, वेतनवृद्धि और भत्तों को बढ़ाने की मांग को लेकर प्रांतीय चिकित्सक संघ ने स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन सौंपा है। संघ ने चेताया है कि अगर उनकी 14 मांगों के निस्तारण पर शासन ने कोई फैसला नहीं लिया तो 23 दिसंबर से आंदोलन शुरू कर देंगे।
शासन स्तर पर नहीं हो रहा विचार
संघ की प्रांतीय कार्यकारिणी के हुई बैठक में इस बात पर चिंता जताई गई कि उनकी मांगों पर शासन स्तर से विचार नहीं हो रहा है। संघ के अध्यक्ष बीएस जंगपांगी ने इस बात पर आपत्ति जताई कि स्वास्थ्य मंत्री से कई दौर की वार्ता के बावजूद कोई नतीजा नहीं मिला है।
वर्ष 2000 बैच के छूटे सभी चिकित्साधिकारियों की प्रोन्नति संयुक्त निदेशक स्तर पर तत्काल की जाए। डायनेमिक एश्योरड कैरियर प्रोग्रेशन (डीएसीपी) के तहत 4 वर्ष, 9 वर्ष, 13 वर्ष और 20 वर्ष में प्रोन्नति लाभ मिले।
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उत्तराखंड के मेडिकल कॉलेजों में पचास फीसदी स्नात्कोत्तर सीटें पीएमएस संवर्ग के लिए आरक्षित हों। पोस्टमार्टम भत्ता और वाहन भत्ता बढ़ाने के साथ यात्रा ड्यूटी पर कार्यरत चिकित्सक का बीमा 20 लाख रुपए किया जाए।
23 दिसंबर का अल्टीमेटम
स्थानांतरण नीति को पारदर्शी बनाने के साथ संविदा चिकित्सकों की तैनाती दुर्गम में की जाए। प्रत्येक चयन वर्ष में विभागीय प्रोन्नति प्रत्येक स्तर पर रिक्त पदों के अनुसार सुनिश्चित की जाए। मांगों को जल्द पूरा करने के लिए संघ ने स्वास्थ्य मंत्री और शासन को 23 दिसंबर का अल्टीमेटम दिया है।
महासचिव डॉ. एसके गोस्वामी के अनुसार 23 दिसंबर पर ओपीडी का पूर्ण बहिष्कार होगा, 6 जनवरी से 8 जनवरी तक ओपीडी का पूर्ण बहिष्कार और 13 जनवरी से सभी स्वास्थ्य सेवाओं को ठप कर दिया जाएगा।
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