राजधानी के लोगों की सेहत पर खतरा मंडरा रहा है। शहर के ही कुछ नर्सिंगहोम बीमारियां बांटने में जुटे हैं। इनसे निकला तकरीबन तीन सौ किलो कूड़ा हर रोज सड़कों पर फिंकवाया जा रहा है।
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इसके करीब से गुजरने वालों को इस कचरे से होने वाली बीमारियों का इल्म तक नहीं। पर नर्सिंग होम हैं कि तमाम खतरों का पता होने के बावजूद पैसा बचाने के चक्कर में इंसीनरेटर पर जैविक कचरा जलवाने के बजाए इसे घरेलू कचरे में ही मिलवा रहे हैं। जाहिर है, संक्रमण कभी भी खतरनाक रोग दे सकता है।
एमपीसीसी ने की शिकायत
मेडिकल पॉल्युशन कंट्रोल कमेटी (एमपीसीसी) ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से शिकायत की है कि शहर के आधे नर्सिंगहोम जैविक कचरा नहीं दे रहे हैं। कमेटी को शहर के नर्सिंगहोमों से चार सौ किलो जैविक कचरा ही मिल पा रहा है।
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बाकी कचरा कहां जा रहा है? पता नहीं है। इस पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी नर्सिंगहोमों को नोटिस जारी किया है। बोर्ड आशंकित है कि जैविक कचरे को घरेलू कचरे में मिलाकर लोगों की सेहत को खतरे में डाला जा रहा है।
ऐसे बांट रहे बीमारी
-प्रति बेड जैविक कचरे का खर्च-साढ़े तीन रुपए
-प्रस्तावित बढ़ी हुई दर-पौने पांच रुपए प्रति बेड
-बीस बेड तक के नर्सिंगहोम के लिए संयुक्त चार्ज-ढाई हजार रुपए महीने
-शहर के नर्सिंगहोम और क्लीनिकों के जैविक कचरे का निस्तारण एमपीसीसी के रुड़की स्थित इंसीनरेटर पर
-इंसीनरेटर पर सौ किलो जैविक कचरा एक घंटे में जलता है
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-ग्रामीण अंचलों के नर्सिंगहोमों के जैविक कचरे के निस्तारण के लिए डीप बरियल की व्यवस्था। कचरे को जमीन में गहराई में गाड़ दिया जाता है
-एमपीसीसी के हरे डिब्बे का कचरा जलाया जाता है और लाल डिब्बे का कचरा आटोक्लेव किया जाता है
-जलाने वाले जैविक कचरे में सड़े मानव अंग, खून, मवाद, जख्म की पट्टियां आदि होती हैं
-आटो क्लेव वाले कचरे में वीगो, कैथीएटर आदि सामान होता है
बीमारियां
एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और सी, पीलिया, फ्लू, गैस्ट्रोइंटाइटिस, आंतों का संक्रमण, सेप्टीसीमिया, लीवर और गुर्दों का संक्रमण, मस्तिष्क का संक्रमण, कैंसर आदि
कमेटी ने कचरा ढोने के लिए राजधानी में दो वाहन और उतार दिए हैं। बहुत से नर्सिंगहोम कचरा देने में आनाकानी कर रहे हैं। बड़े नर्सिंगहोम तो कचरा दे रहे हैं।
- डा. विनय वर्मा, सचिव एमपीसीसी
जैविक कचरा कूड़े में फेंकना खतरनाक है। बच्चे कूड़ा बीनते हैं, उन्हें संक्रमण हो सकता है। कचरे के पास और ऊपर से गुजरने पर भी संक्रमण हो सकता है।
- डा. महावीर सिंह, सीनियर फिजिशियन, दून अस्पताल
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