अटैचमेंट पर महानिदेशालय में बाबूगीरी कर रहे डॉक्टर मरीजों को ही नहीं सरकार को भी धोखा दे रहे हैं। दून जैसे सुगम स्थान पर ड्यूटी कर रहे करीब एक दर्जन डॉक्टर पहाड़ी क्षेत्रों और दुर्गम इलाकों में सेवा के दौरान मिलने वाले तमाम भत्ते भी ले रहे हैं। अटैचमेंट के नाम पर सुगम में मौज काट रहे ये डॉक्टर इन भत्तों के रूप में अब तक लाखों रुपये ले चुके हैं। इस मामले में डॉक्टरों के साथ ही स्वास्थ्य महानिदेशालय भी बराबर का दोषी है, जो सब कुछ जानने के बावजूद डॉक्टरों को लगातार इसका भुगतान कर रहा है।
प्रदेश के पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों में सेवा के लिए डॉक्टरों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने यह विशेष सुविधा शुरू की थी। इसके तहत इन क्षेत्रों में सेवा करने वाले चिकित्सकों को प्रोत्साहन के रूप में कुछ अतिरिक्त भत्ते दिए जाने का प्रावधान है। सामान्य तौर पर रेलवे स्टेशन से 25 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी पर ड्यूटी करने वालों को दुर्गम भत्ता दिए जाने का प्रावधान है। यह बेसिक पे का 20 प्रतिशत होता है।
इसके अलावा प्रदेश के कुछ दुर्गम चिह्नित क्षेत्रों व अस्पतालों में ड्यूटी पर दो हजार रुपये दुर्गम भत्ता अतिरिक्त देय होता है। अतिदुर्गम स्थानों पर भत्ते के रूप में 25 सौ रुपये दिए जाते हैं। पिथौरागढ़ व उत्तरकाशी में ड्यूटी के दौरान 13 सौ रुपये बॉर्डर अलाउंस के रूप में प्रदान किया जाता है। अन्य पहाड़ी जिलों में ड्यूटी करने वालों को छह सौ रुपये हिल अलाउंस मिलता है।
सुगम में नौकरी बजा रहे और ले रहे दुर्गम भत्ता
डॉक्टर
- फोटो : demo pic
नियमानुसार यह भत्ता केवल उन क्षेत्रों में कार्य कर रहे डॉक्टरों को मिलना चाहिए। लेकिन विभाग ऐसे डॉक्टरों को यह सब भत्ते दे रहा है, जो मरीजों की सेवा करने के बजाय महानिदेशालय में बाबूगिरी कर रहे हैं। इन सब भत्तों के रूप में डॉक्टरों को प्रतिमाह करीब दस से 16 हजार रुपए तक अतिरिक्त दिए जा रहे हैं।
अब तक इन चिकित्सकों को लाखों रुपए का भुगतान किया जा चुका है। इसमें रुद्रप्रयाग से डॉ. जेएस नेगी, पौड़ी से डॉ. एलएम सुंदरियाल, चंपावत से डॉ. राजीव पाल व डॉ. पारुल गोयल, उत्तरकाशी से डॉ. मनु जैन, टिहरी से डॉ. एलडी सेमवाल, चमोली से डॉ. एचएस मर्तोलिया समेत अन्य अटैच चिकित्सक शामिल हैं।
कई साल से अटैच हैं डॉक्टर
महानिदेशालय में कई डॉक्टर ऐसे भी हैं, जो अटैचमेंट के एक्सपर्ट हो चुके हैं। यह पिछले कई वर्षों से अटैचमेंट की व्यवस्था पर ही चल रहे हैं। अस्पताल में सेवा दिए इन्हें सालों गुजर चुके हैं। सेटिंग-गेटिंग के दम पर दून में जमे यह डॉक्टर पहाड़ और दुर्गम सेवा के सभी भत्तों का लाभ ले रहे हैं।
इनका है कहना
चिकित्सकों की मूल तैनाती पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में है इसलिए उन्हें यह भत्ते दिए जा रहे होंगे। मुझे इस मामले में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है। मैं अधिकारियों से जानकारी लेने के बाद ही स्पष्ट कह सकूंगी।
-डॉ. कुसुम नरियाल, स्वास्थ्य महानिदेशक
दून से हटेंगे अटैच कर्मचारी
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल ने सभी अटैच डॉक्टरों, फार्मासिस्टों, नर्सों व अन्य कर्मियों को हटाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। चिकित्साधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने सोमवार को सभी अटैच कर्मियों की सूची तलब की। उन्होंने कहा कि मूल तैनाती स्थल पर ज्वाइन ना करने वालों का वेतन ना देने के निर्देश दिए गए हैं। सभी अटैच कर्मियों को तत्काल हटाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।