जिले के चार बड़े अस्पतालों में भटकने के बाद भी चिकित्सक बच्चे का मर्ज नहीं समझ पाए। अंत में बच्चे की मौत हो गई। कोई भी डॉक्टर बच्चे के पिता के सवालों का जवाब नहीं दे पाया।
बुधवार को देहरादून जिले से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। इसने चिकित्सकों समेत सभी को हैरान कर दिया। जिले के नामचीन अस्पतालों के बड़े डॉक्टर भी बच्चे के मर्ज पता नहीं लगा सके। पिता परिवार के साथ बच्चे को लेकर ऋषिकेश एम्स, जौलीग्रांट अस्पताल, दून अस्पताल और देहरादून के एक निजी अस्पताल में लेकर गए। किसी ने प्राथमिक उपचार दिया तो किसी ने कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया। मृतक बच्चे के पिता दलबीर बिष्ट ने बातचीत में बताया कि मंगलवार को सुबह करीब नौ बजे बच्चे की अचानक तबीयत खराब हुई।
इसके बाद बच्चे को ऋषिकेश एम्स लेकर गए। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार देकर बच्चे को घर ले जाने की बात कही। इसके बाद परिवार बच्चे को लेकर जौलीग्रांट अस्पताल लेकर गए। वहां उपचार देने के बाद चिकित्सकों को जब कुछ नहीं समझ नहीं आया तो उन्होंने इलाज से हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद बच्चे को दून अस्पताल लेकर आए। यहां पर चिकित्सकों ने यह कहते हुए इन्कार कर दिया कि उनके पास बच्चे के उपचार के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। इसके बाद उन्होंने बच्चे को देहरादून के एक निजी अस्पताल में ले जाने की बात कही।
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परिवारजन बच्चे को लेकर जब देहरादून के एक निजी अस्पताल पहुंचे तो वहां पर चिकित्सकों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। बच्चे के पिता के मुताबिक बीमार होने के बाद बच्चा अजीबोगरीब प्रतिक्रिया कर रहा था। वह अचानक हाथ-पैर एवं सिर हिला रहा था। परिवार बच्चे के रेबीज पीड़ित होने की भी आशंका जता रहा है।
बच्चा रात को करीब 12 बजे अस्पताल आया था। बाल रोग विशेषज्ञ की टीम ने बच्चे की जांच की। चूंकि बच्चे की हालत काफी गंभीर थी, ऐसे में चिकित्सकों ने उसे रेफर कर दिया था।
-डॉ. नवजोत, इमरजेंसी चिकित्सा अधिकारी, दून अस्पताल