कुछ डाक्टरों के पैसा कमाने की लालच के चलते दून और कोरोनेशन अस्पताल नर्सिंगहोमों के ‘पेशेंट कलेक्शन सेंटर’ बनकर रह गए हैं। दून और कोरोनेशन में काम कर रहे कुछ डाक्टरों के नर्सिंगहोम हैं। ये डाक्टर इन अस्पतालों से मरीजों को नर्सिंगहोम ले जाते हैं। सूत्रों का कहना है कि ये डाक्टर ओपीडी करते इसी वजह से हैं कि अपने नर्सिंगहोमों के लिए मरीज जुटा सकें।
सरकारी डाक्टर नर्सिंगहोम में बुलाते हैं
सरकारी अस्पतालों में मरीज यह सोचकर आता है कि उसे सस्ती चिकित्सीय सुविधाएं मिलेंगी। लेकिन यहां उसके ‘लुटने’ के सारे इंतजाम हैं। सूत्रों का कहना है कि दून अस्पताल में गिनती के डाक्टर हैं जो नर्सिंगहोमों में नहीं जाते। ओपीडी में आने वाले मरीजों को सरकारी डाक्टर नर्सिंगहोम बुलाते हैं।
निजी तौर पर देखे जा रहे मरीजों की जांच भी बाहर की पैथोलोजी में करवाई जाती है, जिससे पैथोलोजियों से भी कमीशन मिल सके।
दून अस्पताल में संविदा पर काम कर रहे एक डाक्टर का अपना नर्सिंगहोम है। इसी तरह कोरोनेशन में काम कर रहे दो डाक्टरों ने नर्सिंगहोम खोल रखे हैं। अस्पताल में आने वाले मरीजों की जांचें ये अपनी पैथोलोजियों में कराते हैं।
कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए ये डाक्टर नर्सिंगहोम के पैड पर मरीज की डायग्नोसिस लिखते हैं, जिससे पकड़ में न आ सकें। सरकारी अस्पतालों से भेजे गए मरीजों से कई गुना अधिक फीस ली जाती है। जो जांचें दून और कोरोनेशन की पैथोलोजी में उपलब्ध हैं, उन्हें भी बाहर से कराया जा रहा है।
मामले की जांच निदेशक दून ग्रुप आफ हॉस्पिटल्स से कराएंगे। इस तरह से गरीब आदमी का खून चूसना गलत बात है। कितने डाक्टरों के नर्सिंगहोम और नर्सिंगहोमों में कौन जा रहा है, सारी रिपोर्ट लेंगे।
-डा योगेशचंद्र शर्मा, महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण
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