देहरादून में डॉक्टरों का आंदोलन खत्म होने के बावजूद भी मरीजों को राहत नहीं मिली। आंदोलन खत्म होने के बाद शुक्रवार को डॉक्टर अस्पतालों में उपलब्ध होंगे।
बिन इलाज गए वापस
टिहरी गढ़वाल से आए किशन अपनी दो साल की बेटी को गोद में लिए बिलबिला रहे थे। तेज बुखार से तप रही वर्षा (2) ने आंखें पलट दी थीं। आखिरकार रो-धोकर वापस हो लिए।
नेहरूग्राम से आईं विमला बहुत देर तक पैथोलोजी के सामने पड़ी बेंच पर पिता विश्वनाथ का सिर गोद में लिए बैठी रहीं।
ये दो घटनाएं उस वक्त की हैं जब हड़ताल खत्म हो चुकी थी। ओपीडी का समय दिन बजे तक होता है। लेकिन हड़ताल खत्म होने के बाद डॉक्टरों ने छुट्टी मना ली।
डॉक्टरों ने नहीं बताई हड़ताल वापसी की खबर
कुछ आए भी तो इधर-उधर खड़े रहे। तीमारदार मायूस होकर मरीजों को लेकर चले गए। सूत्रों का कहना है कि सुबह ही कानपुर में हड़ताल वापसी की खबर आ गई थी। लेकिन कुछ डॉक्टरों ने नेतागीरी चमकाने के चक्कर में आम डॉक्टरों को यह बात नहीं बताई।
प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संघ की बैठक सुबह सवा आठ बजे हुई थी। इसमें कुछ डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म होने संबंधी बात उठाई भी थी, लेकिन बाकी डॉक्टरों ने इसका विरोध कर दिया।
अगर संघ के जिम्मेदार कायदे से पता कर लेते तो बड़ी संख्या में अस्पतालों में पहुंचे गरीब मरीजों की छीछालेदर न होती। उन्हें इलाज मिल जाता। आईएमए देहरादून के अध्यक्ष डॉ. कुलदीप दत्ता का कहना है कि उन्हें दोपहर 12 बजे पता चला था।
पैथोलोजिकल जांचें भी नहीं हुई
दून अस्पताल में मरीजों की पैथोलोजिकल जांचें भी नहीं हो पाईं। जिन मरीजों ने बुधवार को ओपीडी में जांच कराई थी, वे गुरुवार को ब्लड देने आए थे।
लेकिन अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस असवाल ने बिलिंग क्लर्क को मनाकर दिया था कि ओपीडी के रोगियों के बिल न बनाए जाएं। इस चक्कर में कई रोगी मायूस होकर लौट गए।
पूछा तो बोले कि डॉक्टर हड़ताल पर थे। पैथोलोजी में दिन में टेक्नीशियन काम कर रहे थे। टेक्नीशियन ही ब्लड सैंपल जांच के लिए मशीन में लगाते हैं।
हड़ताल से लौट सर्जरी की
परेड ग्राउंड में हड़ताल वापसी की घोषणा के बाद कोई डॉक्टर ओपीडी में नहीं आया। वहीं सीनियर आई सर्जन डॉ. बीसी रमोला ने एक मिसाल भी कायम की।
परेड ग्राउंड से वह सीधे अपनी ओपीडी में आए। इसके बाद ओटी में जाकर दो मरीजों की आंखों का आपरेशन किया।