उत्तराखंड सरकार सोमवार को चिकित्सकों के घोषित कार्य बहिष्कार का कोई हल नहीं निकाल पाई है। इससे प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मुसीबत पेश आनी तय है।
उल्लेखनीय है कि घर पर निजी प्रैक्टिस करने के आरोप में काशीपुर जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बीसी जोशी की गिरफ्तारी के विरोध में सरकारी डाक्टरों ने सोमवार को ओपीडी के बहिष्कार का फैसला किया है।
बताया गया है कि स्वास्थ्य महकमा प्रांतीय चिकित्सक संघ से वार्ता कर मामले को सुलझाने के प्रयास में जुटा है। संविदा चिकित्सकों के माध्यम से कुछ अस्पतालों में ओपीडी चल सकती है, लेकिन जिला स्तर के अस्पताल में यह विकल्प भी कारगर नहीं है।
स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह ने महानिदेशक चिकित्सा डॉ. जीएस जोशी को आंदोलनरत चिकित्सकों से वार्ता के निर्देश दिए हैं। चिकित्सकों के संघ से ओपीडी बहिष्कार का औपचारिक पत्र भी अभी तक स्वास्थ्य महानिदेशालय को नहीं मिला है, लेकिन आंदोलन पर जाने की अल्टीमेटम से महकमे के आला अधिकारी अपने स्तर से वार्ता में जुटे हैं।
विभाग के लिए राहत की बात इतनी है कि इमरजेंसी सेवाओं में चिकित्सक सेवाएं देते रहेंगे। चिकित्सकों ने डॉ. जोशी को रिहा करने के साथ पूरे प्रकरण की विभागीय जांच की मांग उठाई है। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. जेसी जोशी ने बताया कि चिकित्सकों की चारों मांगों के संबंध में स्वास्थ्य मंत्री और शासन को अवगत करवा दिया है।
उम्मीद है कि जल्द समाधान निकाला जाएगा ताकि अस्पतालों में सुचारु कामकाज चल सके। फिलहाल संविदा चिकित्सकों से कुछ स्थानों पर ओपीडी की वैकल्पिक व्यवस्था बनाने के प्रयास किये जा रहे हैं।
चिकित्सकों से वार्ता कर मामले को सुलझाने के प्रयास किये जा रहे हैं। उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा। प्रमुख सचिव और डीजी हेल्थ को निर्देश दिए हैं कि चिकित्सकों से वार्ता करें।
- सुरेंद्र सिंह नेगी, स्वास्थ्य मंत्री