लंबित मांगों पर अमल नहीं होने से नाराज प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ से जुड़े चिकित्सकों ने दस से 12 अप्रैल तक आपातकालीन और पोस्टमार्टम छोड़कर अन्य सभी स्वास्थ्य सेवाएं ठप करने का एलान किया है।
उनका कहना है कि इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गईं तो 13 अप्रैल से प्रदेशभर के चिकित्सक पूर्णकालिक कार्य बहिष्कार शुरू करेंगे। शनिवार को संघ की स्वास्थ्य महानिदेशालय में आयोजित बैठक में डॉक्टरों ने कहा कि यात्रा सीजन के दौरान चिकित्सकों की ड्यूटी यात्रा में लगा दी जाती है, लेकिन उनके आवास और भोजन की व्यवस्था नहीं की जाती।
वहीं, चिकित्सकों को केंद्र सरकार के सातवें वेतन के अनुरूप नॉन प्रैक्टिस अलाउंस भी नहीं दिया जा रहा।
चिकित्सकों को 30 फीसदी दुर्गम भत्ता भी नहीं दिया जा रहा
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संगठन के प्रांतीय महासचिव डॉ. दिनेश चौहान ने कहा कि चिकित्सकों को 30 फीसदी दुर्गम भत्ता भी नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने डीएसीपी के लाभ को लेकर कुछ प्रतिबंधों को हटाने की भी मांग की। संगठन के प्रांतीय उपाध्यक्ष आनंद शुक्ला ने कहा कि चिकित्सकों की अनदेखी के चलते हर साल 15 से अधिक चिकित्सक वीआरएस लेने को मजबूर हैं।
बैठक में लंबित मांगों पर कार्रवाई और मुख्यमंत्री कार्यालय से कई बार पत्राचार के बावजूद उनसे वार्ता न हो पाने पर नाराजगी जताई गई। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष डॉ.डीपी जोशी, डॉ.मेघना असवाल, डॉ.अजीत मोहन जौहरी, डॉ.राम प्रकाश, डॉ.प्रदीप राणा, डॉ.चारू बहुगुणा, डॉ.संजीव सिंह, डॉ.गरिमा पंत, डॉ.प्रियंका सिंह आदि मौजूद रहे।