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ज्वाइन करते ही न्यूरो सर्जन ने अस्पताल को कहा अलविदा

Fri, 10 Oct 2014 10:44 PM IST
गंगा असनोड़ा थपलियाल/अमर उजाला, श्रीनगर
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तीस सितंबर को ज्वाइन करने के बाद एक अक्तूबर को मरीज देखने के बाद उसी रात न्यूरो सर्जन डॉ. अनिल मनचंदा ने मेडिकल कॉलेज छोड़ दिया। तब से वह लौटकर नहीं आए। अब पता चला कि वह कॉलेज को बाय-बाय कर चुके हैं। कॉलेज छोड़ने के बाबत उन्होंने किसी को सूचना नहीं दी थी, इसलिए माना जा रहा था कि वे लौटकर आएंगे
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हालांकि एक अक्तूबर को रात करीब साढ़े 10 बजे उन्होंने इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डा.संजय मौर्या से कहा था कि ‘अब मैं उपलब्ध नहीं रहूंगा’।

राजकीय मेडिकल कॉलेज में वॉक इन इंटरव्यू के माध्यम से 10 सितंबर को एक ऐसे ही न्यूरो सर्जन को नियुक्ति दी गई, जिन्होंने ज्वाइनिंग लेने के एक दिन बाद ही अपनी सेवाएं देने से इन्कार कर दिया है। 30 सितंबर को ज्वाइनिंग के लिए पहुंचे 66 वर्षीय न्यूरो सर्जन डा. अनिल मानचंदा ने ज्वाइनिंग के बाद विभागध्यक्ष डा.अनिल साहनी को इमरजेंसी तथा ओपीडी में सेवाएं देने की बात कही।

1 अक्तूबर को उन्होंने ओपीडी में बैठकर कई मरीज देखे। इसके बाद रात करीब साढ़े आठ बजे तीन इमरजेंसी मरीजों के पहुंचने पर जब उन्हें कॉल किया गया, तो वे इमरजेंसी तक आए। तीनों रोगियों में से एक को रैफर किया तथा दो को इलाज दिया लेकिन इसके बाद वहां से निकलने से पहले वे ईएमओ डा.संजय मौर्य से साफ शब्दों में कहकर चले गए कि अब वे उपलब्ध नहीं रहेंगे। दूसरे ही दिन वे सुबह-सवेरे श्रीनगर से देहरादून के लिए रवाना हो गए।
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कहा, रहने के लिए नहीं मिला सही कमरा

न्यूरो सर्जन डॉ.अनिल मनचंदा ने बताया कि उन्हें रहने के लिए सही कमरा नहीं दिया गया। इसीलिए वे मेडिकल कॉलेज छोड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि अब दोबारा मेडिकल कॉलेज में आने का उनका इरादा नहीं है।

पूर्व में भी छोड़कर जा चुके हैं न्यूरोलॉजिस्ट
डॉ. अनिल मनचंदा श्रीनगर से जाने वाले इकलौते डॉक्टर नहीं है। इसके पहले बेस अस्पताल में भी न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. महेश रमोला छोड़कर जा चुके हैं। डेढ़ वर्ष से यहां सिर की गंभीर चोट या अन्य जरूरतमंद रोगियों को न्यूरो सर्जन न होने से रेफर करना पड़ रहा है।

प्राचार्य का है कहना
डॉ. अनिल मनचंदा ने कोई लिखित शिकायत नहीं की। इसलिए हमें जानकारी नहीं है। विभागाध्यक्ष से जानकारी ले ली गई है, जो शासन को भेजी जाएगी।
-डॉ. आईएस योग, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज।
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