डीएम ने बताया कि सभी स्टोन क्रशरों पर खनन सामग्री खरीदने के मानकों का उल्लंघन किया जा रहा था। कई अन्य अनियमितताएं मिली हैं। स्टोन क्रशर कैंपस में स्टॉक का आकलन कर जुर्माना लगाने समेत अन्य कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
बॉडीटीप से सटे चार स्टोन क्रशरों पर वाहनों की आवाजाही के लिए रास्ता तक नहीं है। ये स्टोन क्रशर पूरी तरह गंगा के भूभाग में ही लगाए गए हैं। स्टोन क्रशरों को देखकर अधिकारी खुद भी भौचक्के रह गए। जब स्टोन क्रशर की अनुमति दी जाती है तो कुछ मानक पूरे करने होते हैं।
लेकिन इन स्टोन क्रशरों को देखकर यह भी साबित हो गया कि भौतिक सत्यापन नहीं किया गया बल्कि अधिकारियों ने कार्यालयों में बैठकर अनुमति जारी कर दी गई। जिलाधिकारी दीपक रावत ने बताया कि इन चारों स्टोन क्रशरों की अनुमति निरस्त करने की कार्रवाई की जा रही है। एसडीएम से रिपोर्ट तलब की गई है।
जिन क्षेत्रों में स्टोन क्रशर स्थित है, वहां छोटे वाहनों की आवाजाही के लिए समुचित रास्ते न होने और पूर्व में छापे मारे जाने की सूचना लीक होने को देखते हुए अधिकारियों ने इस बार एहतियात बरती। जिलाधिकारी दीपक रावत समेत अन्य अधिकारी डंपर और ट्रैक्टर ट्रालियों पर बैठकर पहुंचे। जिलाधिकारी ने बताया कि छापेमारी जारी रहेगी। अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी।
डेढ़ साल में 75 करोड़ का लगाया गया जुर्माना
पिछले डेढ़ साल में प्रशासन की ओर से करीब 30-35 स्टोन क्रशर सीज किए गए। इन पर करीब 75 करोड़ रुपये जुर्माना क्रशर संचालकों पर आरोपित किया जा चुका है। एसडीएम मनीष कुमार सिंह ने बताया कि अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।