जिलाधिकारी दीपक रावत ने छापा मारकर राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) की इंटरमीडियट की भौतिक परीक्षा में सामूहिक रूप से नकल कराने का भंडाफोड़ किया है।
परीक्षार्थियों को बाकायदा प्रश्नपत्र हल करके जवाब भी लिखित में दिए गए थे। जिलाधिकारी ने केंद्र व्यवस्थापक संस्थान के ड्यूटी पर तैनात स्थानीय प्रभारी और अन्य संबंधित जिम्मेदार लोगों को खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए है।
वहीं परीक्षा को निरस्त करने की संस्तुति की है। नकल कराने के लिए प्रश्नपत्र पहले ही लीक कर दिया गया था। अनुमान लगाया जा रहा है कि मोटे पैसे लेकर यह खेल खेला गया।
घटनाक्रम के अनुसार दोपहर करीब दो बजे एक छात्र ने जिलाधिकारी दीपक रावत को फोन पर सूचना दी कि धीरवाली ज्वालापुर स्थित आदर्श शिशु निकेतन (एएसएन) विद्यालय में चल रही एनआईओएस के भौतिक विज्ञान की परीक्षा में पेपर लीक कर दिया गया है और खुलेआम नकल कराई जा रही है।
लीक किए गए पेपर को वाहट्सएप पर भी भेज दिया गया। जिसे देखकर जिलाधिकारी भौचक रह गए। उन्होंने एक और परीक्षा केंद्र केंद्रीय विद्यालय भेल में पहुंचकर मिलान किया तो पाया कि लीक किया गया पेपर आज का ही था। जिस पर उन्होंने तत्काल धीरवाली स्थित स्कूल में एसडीएम मनीष कुमार सिंह के साथ छापा मारा। सूचना सही मिली।
परीक्षा कक्ष में पहली ही पंक्ति में बैठे तीनों बच्चें उपलब्ध कराए गए जवाबों से नकल कर रहे थे। जिलाधिकारी के छापे से वहां अफरातफरी मच गई। बच्चों की परीक्षा कापियां सील कर दी गई और विद्यालय प्रबंधन और एनआईओएस के ओएसडी एमएल भट्ट और विद्यालय के संचालक कृपाल सिंह चौहान को कड़ी फटकार लगाते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए।
साथ ही एनआईओएस के क्षेत्रीय निदेशक प्रदीप रावत से फोन पर बात कर जिलाधिकारी ने परीक्षा को रद्द करने की संस्तुति की है। भविष्य में कभी भी इस विद्यालय को परीक्षा केंद्र न बनाए जाए। इस तरह की भी रिपोर्ट भेजे जाने की बात जिलाधिकारी ने कही है।
सीसीटीवी कैमरे खोलेंगे राज
बैंक में रखे हुए पेपर कैसे बाहर निकल गए। इस पर जिलाधिकारी ने जांच के आदेश कर दिए हैं। अब सीसीटीवी पूरे मामले का राज खोल देगा। सीसीटीवी में पूरी कहानी कैद हुई है कि आखिर पेपर लेने कोई आया और किसने परीक्षा से एक दिन पूर्व ही पेपर उपलब्ध करा दिया। पूरा राज सीसीटीवी से खुलेगा।
एनआईओएस का पेपर लीक होने के बाद मालूम हुआ है कि एक पेपर के परीक्षार्थियों से चार से पांच हजार रुपये लिए जाते थे। परीक्षार्थी भी दो या तीन मिलकर पेपर को खरीदते थे। पेपर की फोटो स्टेट कर बच्चों को उपलब्ध कराई जाती थी।
अक्तूबर माह में उन बच्चों के पेपर होते है, जो अन्य बोर्ड की परीक्षा की फेल हो जाते है। बुधवार की परीक्षा में उत्तराखंड और सीबीएसई बोर्ड के बच्चे परीक्षा दे रहे थे। जो बच्चों दो विषयों में फेल होते है, उनको एनआईओएस से तीन विषयों का पेपर देना होता है। इन पेपरों का रिजल्ट दिसंबर माह में आता है।