जिला पंचायत में अनियमितताओं और दुकानों के आवंटन में धांधली की जांच करने निकले डीएम ने ग्राहक बनकर पूरे खेल की पोल खोल दी। डीएम ने फोन पर ग्राहक बनकर संपर्क साधा तो एजेंट ने दुकान की कीमत 15 लाख बताई।
जांच की शुरूआत में ही जिला पंचायत से सस्ती दुकान लेकर महंगी बेचने की शिकायत सही पाई गई है। डीएम ने शुक्रवार को ही जिला पंचायत पहुंचकर आवंटन से जुड़ी पत्रावलियां भी खंगाली।
जिला पंचायत की ओर से हरिद्वार तहसील के बाहर दूसरी मंजिल पर 26 दुकानों का निर्माण कराते हुए आवंटन किया गया था। इनके अलावा 26 अन्य दुकानों का निर्माण फिलहाल भी चल रहा है।
वहीं भगवानपुर में भी 14 दुकानों का निर्माण कराते हुए आवंटन किया गया था। दुकानों के आवंटन में धांधली और जिला पंचायत में अनियमितता का आरोप लगाते हुए शासन में शिकायतें की गई थी।
शासन ने जिलाधिकारी दीपक रावत को शिकायतों की जांच सौंपी है। शुक्रवार को डीएम दीपक रावत पहले जिला पंचायत कार्यालय पहुंचे और आवंटन की पत्रावलियां तलब करते हुए जानकारी जुटाई।
बाद में तहसील के बाहर दुकानों का स्थलीय निरीक्षण करने पहुंचे। यहां एक दुकान पर प्रोपर्टी डीलर का बोर्ड लगा देख डीएम हैरान रह गए। नियमानुसार जिला पंचायत से दुकान लेकर उसकी खरीद फरोख्त नहीं की जा सकती।