धर्मनगरी को जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए सड़क पर उतरे जिलाधिकारी दीपक रावत खुद जाम में फंस गए। उन्होंने सिंहद्वार से लेकर सीतापुर बाईपास तक चौड़ीकरण का जायजा लिया। काम की धीमी रफ्तार पर डीएम का पारा चढ़ गया।
उन्होंने हाईवे प्राधिकरण के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। साथ ही चेताया कि एक जुलाई तक सड़क निर्माण पूरा नहीं होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यात्रा सीजन में हर शनिवार और रविवार को हाईवे पर जाम रहता है। वहीं अंदरूनी मार्गों पर भी लोग जाम से जूझते हैं। अमर उजाला में समाचार प्रकाशित होने के बाद जिलाधिकारी दीपक रावत ने सोमवार को अधीनस्थों की बैठक बुलाई और निर्देश दिए कि शहर को हर सूरत में जाम से निजात दिलानी है।
अधिकारी काम तेज गति से न होने और बिगड़ती यातायात व्यवस्था को लेकर बहाने बताते रहे, पर डीएम इनसे संतुष्ट नहीं हुए। शाम के समय डीएम खुद हाईवे का निरीक्षण करने निकले।
अधिकारी कर रहे हीलाहवाली
शाम करीब छह बजे डीएम ने सिंहद्वार के पास कई साल से चल रहे निर्माण कार्य की प्रगति जानी। सिंहद्वार के पास पहुंचने पर उनकी गाड़ी जाम में फंस गई। इस दौरान उन्होंने पाया कि जरूरत के हिसाब से कार्यदायी संस्था ने संसाधन और मजदूर नहीं लगाए हैं।
जिस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई कि बहाना अन्य विभागों के अधिकारियों से सहयोग न मिलने का बनाया जा रहा है, जबकि काम खुद ही सही तरीके से नहीं किया जा रहा है।
यही स्थिति उन्होंने लाल पुल, सीतापुर बाईपास व चंडी चौक के आसपास भी पाई। डीएम ने बताया कि वह हर रोज निर्माण कार्यों की समीक्षा करेंगे। एक जुलाई तक काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
लाल पुल और चंडी चौक के समीप अंडर पास का काम 15 दिन में पूरा करने की हिदायत दी। निरीक्षण के दौरान एडीएम ललित नारायण मिश्रा, एसडीएम मनीष कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट जयभारत सिंह, एसपी सिटी प्रमेंद्र डोबाल, लोनिवि के अधिशासी अभियंता यूएस रावत, ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता वीएस पंवार, नेशनल हाईवे के प्राजेक्ट मैनेजर प्रदीप गुसाईं, एसके चावला, एचआरडीए के सचिव अरविंद पांडेय, डिप्टी कलेक्टर संगीता कन्नौजिया, सीओ जेपी जुयाल, मनोज कात्याल आदि मौजूद रहे।