600 किमी का रूट... बस सिर्फ एक
पर्वतीय डिपो के अंतर्गत देहरादून से 55 रूटों पर बसें संचालित की जा रही हैं। इनमें 45 रूटों पर परिवहन निगम की बसें, जबकि दस रूटों पर अनुबंधित बसों का संचालन किया जा रहा है। कुल 55 बसों का संचालन पर्वतीय क्षेत्रों के लिए किया जा रहा है। पहाड़ के सबसे बड़े रूटों में बागेश्वर, धुमाकोट, बड़कोट, तपोवन के हैं। इन सभी रूटों पर आने जाने में बस को करीब 600 किमी. का सफर तय करना पड़ता है। इन रूटों पर भी दिन में सिर्फ एक बस ही संचालित होती है। इसके अलावा नई टिहरी, द्वाराहाट, मंडल गोपेश्वर, तिलवाड़ा, हनोल, श्रीनगर के लिए भी पूरे दिन में एक बस चलती है। हल्द्वानी व नैनीताल के लिए भी दिन में एक बस है। इस कारण पहाड़ी रूटों पर जाने के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है। मसूरी जाने वालों के लिए राहत है। मसूरी के लिए दिन में दस से अधिक बसों का संचालन होता है।
वॉल्वो बसें राहत की उम्मीद
दून से दिल्ली के लिए 70 से अधिक बसें संचालित हो रही हैं, इसमें करीब 35 बसें वॉल्वो हैं। दिल्ली के अलावा गुड़गांव, पांवटा, कटरा, चंडीगढ़, लखीमपुर, आगरा, अंबाला, कानपुर, लखनऊ, जयपुर व अयोध्या के लिए भी ग्रामीण डिपो की बसें संचालित हो रही हैं। ट्रेनों में टिकट की मारामारी बढ़ने पर वॉल्वो बसों में सफर करने के लिए ऑनलाइन बुकिंग अभी से हो गई है।
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परिवहन निगम ने सवारियों के लिए पूरी व्यवस्था कर ली है। दिल्ली के लिए बसों के फेरे बढ़ाए जा रहे हैं। इसके अलावा पहाड़ी रूटों पर भी अतिरिक्त बसें लगाने के लिए निर्देशित किया गया है। - रेखा कहेरा, मंडलीय प्रबंधक