उत्तराखंड में लक्ष्मी पूजा और महालक्ष्मी व्रत अहम है। पुराणों में लिखा है कि मां घनघोर रात में आती हैं। 20 अक्तूबर को प्रदोष काल भी मिल रहा है। इसी दिन प्रदोष और अर्धरात्रि में अमावस्या दोनों मिल रहे है। इसके चलते 20 अक्तूबर को ही दीपावली का पर्व मनाया जाएगा।
- आचार्य पवन पाठक
अमावस्या प्रदोष काल में व्याप्त होना जरूरी है। 21 अक्तूबर को प्रदोष काल 14 मिनट पड़ रही है लेकिन इसका एक दंड यानी 24 मिनट होना जरूरी है। इसके कारण 20 अक्तूबर को दीपावली का पर्व मनाया जाना है। कई पंचाग में यही लिखा है।
- आचार्य राजेश बेंजवाल, तंत्रकुल के संस्थापक
21 को दीपावली मनाने के मत
अमावस्या की तिथि 20 अक्तूबर को 3:44 बजे शुरू होगी। दीपावली का पर्व अमावस्या में होता है। कोई भी कार्य में पितृ पूजन करते हैं। शास्त्र में दिन में किया जाता है। 21 अक्तूबर को उदय तिथि पड़ रही है। ऐसे में दीपावली का पर्व 21 अक्तूबर को ही मनाया जाएगा।
- सौरभ डोभाल, आचार्य श्री श्री आनंदमई आश्रम, रायपुर
धर्मशास्त्र निर्णय सिंधु के अनुसार महालक्ष्मी पूजन व दीपोत्सव प्रदोष काल अमावस्या एवं तंत्र-मंत्र साधना निशीथ काल में ही हो सकती है। 20 अक्तूबर को चतुर्दशी तिथि अपराह्न 3:45 बजे पर समाप्त हो रही है, उसके बाद अमावस्या 21 अक्तूबर को शाम 5:55 बजे तक है। अक्षांश और देशांतर में अंतर होने से पूर्वी उत्तर प्रदेश सहित देश के अन्य भागों में दीपावली 20 अक्तूबर को मनाया जाना सही है लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित गढ़वाल और कुमाऊं मिलाकर पूरे उत्तराखंड में 20 अक्तूबर को छोटी दीपावली और 21 अक्तूबर को शाम 5:35 बजे से 8:14 बजे तक प्रदोष काल में महालक्ष्मी पूजन और दीपोत्सव का त्योहार मनाना शास्त्र सम्मत है।
- डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल, आचार्य उत्तराखंड ज्योतिष रत्न