राष्ट्रीय विस्फोटक नियंत्रक ने पटाखों की बिक्री व संग्रह संबंधी 18 बिंदुओं के दिशा निर्देश जारी किए हैं। इनमें नियम छह कहता है कि कोई भी विक्रेता सिर्फ भारत में निर्मित पटाखे ही बेच सकता है। ऐसा न करने पर स्थानीय प्रशासन उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।
क्यों हैं बैन
दरअसल, भारत में बने पटाखे यहां के नियम कायदों को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं। मसलन, हर पटाखे पर यह लिखना अनिवार्य है कि उसकी ध्वनि तीव्रता कितने डेसिबल होगी। भारत में अलग-अलग समय पर अलग-अलग तीव्रता वाले पटाखे ही जलाए जा सकते हैं। इनकी तीव्रता 45 से लेकर 60-70 डेसिबल तक हो सकती है। डॉक्टरों के अनुसार 95 डेससिबल से अधिक की आवाज कान के पर्दे को नुकसान पहुंचा सकती है।